लखनऊ में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व बादलों और बारिश के बीच मनाया गया, जिससे कई इलाकों में महिलाएं चांद के दर्शन नहीं कर सकीं. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्नी नम्रता पाठक के साथ पूजा की और उन्हें पानी पिलाकर व्रत खुलवाया.
लखनऊ. राजधानी में गुरुवार को करवा चौथ का पर्व बादलों और बारिश के बीच मनाया गया. मौसम खराब रहने के कारण शहर के कई इलाकों में महिलाएं चांद का दीदार नहीं कर सकीं, जबकि कुछ महिलाओं ने वैकल्पिक तरीके से पूजा कर व्रत खोला. इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्नी नम्रता पाठक के साथ पूजा की और उन्हें पानी पिलाकर व्रत खुलवाया.
बारिश के बीच पूजन
करवा चौथ पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधान और साज-श्रृंगार के साथ चांद निकलने का इंतजार किया. सराय माली खां में नीतू रस्तोगी और रूपाली रस्तोगी ने थाली में चांद की आकृति बनाकर पूजा की और फिर व्रत खोला. मरीन ड्राइव पर महिलाओं ने छलनी से चांद देखने की परंपरा निभाई और पतियों की लंबी उम्र की कामना की.

मोतीनगर स्थित श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम में भी महिलाओं ने करवा चौथ की पूजा की. इंदिरानगर के ए ब्लॉक में महिलाओं ने अपने पतियों के साथ पर्व मनाया. गोमतीनगर के विपुलखंड में गौरी गुप्ता, माया यादव, मनु चौहान, सुनयना चौधरी, आरती समेत अन्य महिलाओं ने पूजा-अर्चना की. पंकज और कोपल मेहरोत्रा ने भी करवा चौथ का पर्व मनाया.
ब्रजेश पाठक ने खुलवाया व्रत
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी नम्रता पाठक के साथ करवा चौथ की पूजा की. इसके बाद उन्होंने पत्नी को पानी पिलाकर उनका व्रत खुलवाया.
इस मौके पर नम्रता पाठक ने सभी को करवा चौथ की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह व्रत परिवार, बच्चों और पति की लंबी उम्र की कामना करने का अवसर है. उन्होंने भगवान गौरी-शंकर से परिवार के सदस्यों की दीर्घायु की प्रार्थना की और चंद्र देव को नमन किया.
चांद नहीं दिखे तो क्या करें
बारिश या बादलों के कारण चांद नजर नहीं आने पर निर्धारित चंद्रोदय के समय चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोलने का विकल्प बताया गया है. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, चौकी पर चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर छलनी से उसके दर्शन किए जा सकते हैं. इस दौरान ‘ॐ चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करने या भगवान शिव अथवा चांदी के सिक्के को चंद्रमा का प्रतीक मानकर पूजा करने का भी विकल्प बताया गया है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
दी गई पंचांग संबंधी जानकारी के मुताबिक, चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की रात 1:06 बजे शुरू होकर 29 अक्टूबर की रात 10:09 बजे तक रही. पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:26 बजे से 6:43 बजे तक बताया गया था, जबकि चंद्रोदय का निर्धारित समय रात 8:06 बजे था.
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, शुक्र अस्त होने के बावजूद महिलाएं विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं. उन्होंने महिलाओं को इस स्थिति को लेकर परेशान न होने की सलाह दी.

