कुंदन कुमार, पटना। बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। हाल ही में जेडीयू (JDU) कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिहार सरकार के मंत्री मदन साहनी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए लगभग एक साल हो चुका है, लेकिन विपक्षी पार्टियां अब एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बार फिर से चुनाव कराने जैसी बातें कर रही हैं। मंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि बिहार की जागरूक जनता ने एनडीए (NDA) के पक्ष में अपना पूर्ण बहुमत दिया था। जनता भली-भांति जानती है और यह नहीं चाहती कि किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसी पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी करे।
विपक्ष के पास मुद्दों का अभाव
मंत्री मदन साहनी ने आगे कहा कि विपक्षी दलों के पास इस समय सरकार को घेरने के लिए कोई भी ठोस मुद्दा नहीं बचा है। यही वजह है कि वे लगातार अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। कभी वे सत्ता पक्ष के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाते हैं तो कभी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने विपक्षी बयानों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित करार दिया।
अनंत सिंह के समर्थन पर टालमटोल
पत्रकारों द्वारा जब मंत्री मदन साहनी से यह तीखा सवाल पूछा गया कि जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह खुलेआम ‘जन सुराज पार्टी’ के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं, तो उन्होंने इस पर कोई भी सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि यह सबकी अपनी-अपनी सोच और व्यक्तिगत विचार का मामला है। अगर किसी की सोच वैसी है, तो वे अपने तरीके से काम कर रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के किसी भी बड़े नेता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने से किनारा कर लिया है।
जेडीयू विधायक अनंत सिंह का खुला विरोध
दूसरी ओर, जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के तेवर काफी बागी नजर आ रहे हैं। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर खुलेआम जन सुराज पार्टी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह के नामांकन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान अनंत सिंह ने मीडिया के सामने खुलकर घोषणा की कि वे मौजूदा विधान पार्षद और जेडीयू नेता नीरज कुमार के प्रबल विरोधी हैं और वे उन्हें इस चुनाव में निश्चित तौर पर हराकर ही दम लेंगे। इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सत्ताधारी दल के भीतर ही अंतर्द्वंद्व खुलकर सामने आ रहा है।

