कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के हिसाब 27 प्रतिशत आरक्षण असंवैधानिक है। 

27 प्रतिशत के हिसाब से जो भर्ती पहले हो चुकी है वह बरकरार रहेगी।29 सितंबर, 2022 तक की ज्वाइनिंग वैध रहेगी। इसके बाद की ज्वाइनिंग मान्य नहीं रहेगी।

जनरल वर्ग के वकील आदित्य संघी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को लैंडमार्क बताया। उन्होंने कहा कि देश के कई हाई कोर्ट में इस फैसले की नजीर दी जाएगी। पापुलेशन के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी स्पष्ट है। सरकार राजनीति के लिए सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन की अवहेलना कर रही थी।

ओबीसी वर्ग के वकील विनायक शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने मजबूती से ओबीसी का पक्ष नहीं रखा। सरकार ने जानबूझकर ओबीसी का पक्ष रखने वाले वकीलों को अलग किया। यह सरकार का फेलियर है कि ओबीसी आरक्षण लागू नहीं करवा पाई। विधान सभा से पास कानून के विरोध में जाकर फैसला हुआ। बीजेपी सरकार शुरू से ओबीसी विरोधी रही है।

भाजपा प्रवक्ता योगेश गुप्ता ने ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि कमलनाथ सरकार ने 27% आरक्षण लागू करने के लिए जरूरी विशेष परिस्थितियों को हाईकोर्ट के सामने नहीं रखा। कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष और प्रदेश प्रवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर करवाई।हाईकोर्ट ने विशेष परिस्थितियां साबित नहीं होने के आधार पर 27% OBC आरक्षण को लेकर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए मध्यप्रदेश सरकार OBC वर्ग के हितों के लिए संवेदनशीलता से काम करेगी। सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनः अपील की तैयारी करेगी। OBC आरक्षण के पक्ष में जरूरी तथ्य सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएंगे। 

ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि हम ओबीसी के साथ हैं। पूर्ववर्ती सरकार में आधी अधूरी जानकारी की वजह से यह फैसला आया है और सरकार ओबीसी वर्ग के साथ है। ओबीसी वर्ग के लिए सरकार कदम उठाएगी। हम लोग अभी इसकी समीक्षा कर रहे हैं। रही बात ओबीसी वर्ग के हित की तो हमारी सरकार ने ओबीसी आयोग बनाने का काम किया है।

कमलनाथ ने बीजेपी को बताया ओबीसी विरोधी

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी को ओबीसी विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का ओबीसी विरोधी चेहरा अब पूरी तरह प्रदेश के सामने आ चुका है। वर्ष 2019 में मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में कांग्रेस सरकार ने देश के अन्य राज्यों की तरह प्रदेश में भी ओबीसी को 27% आरक्षण दिया था। लेकिन भाजपा की सरकारें शुरू से ही इस आरक्षण को समाप्त करने का षड्यंत्र कर रही थीं। सरकार की कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी सूचनाएँ देने से माननीय हाई कोर्ट ने ओबीसी को 27% आरक्षण को रद्द कर दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह से भाजपा ने अदालत में कमजोर पक्ष रखकर ओबीसी वर्ग की पीठ में छुरा घोंपा है। अदालत के आदेश से साफ़ है कि भाजपा सरकार अदालत को अपने तर्कों से संतुष्ट नहीं कर पाई। असल में भाजपा शुरू से ही आरक्षण के ख़िलाफ़ थी और कोशिश कर रही थी कि ख़ुद आरक्षण ख़त्म करने के बजाय अदालत के माध्यम से यह काम कराए। मैं भाजपा को चेतावनी देता हूँ कि ओबीसी वर्ग के साथ यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, हर स्तर पर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिलाने की लड़ाई लड़ी जाएगी।

सपाक्स के डॉ. केएस तोमर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट नहीं बदल सकता। हाई कोर्ट का फैसला यही आना था यह सबको पता था। कमलनाथ भी जानते थे कि यह फैसला हाई कोर्ट नहीं बदल सकता। यह कांग्रेस की कुटिलता थी, दो वर्गो को लड़ाना चाह रहे थे। यह वोट की राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं था।

उन्होंने कहा कि ओबीसी का आरक्षण बढ़ना चाहिए था। ST, SC का आरक्षण कम होना चाहिए था। जिस वर्ग की जितनी संख्या है उसका 50% के हिसाब से आरक्षण दिया जाना था। कमजोर वर्ग को तक आरक्षण का लाभ नहीं पहुंच रहा है। 50% की सीमा के अंदर आरक्षण दिए जाने चाहिए। योग्यता को कुचला नहीं जा सकता। ओबीसी का आरक्षण बढ़ाना चाहिए एसटी एससी का आरक्षण कम करना चाहिए। क्रीमीलेयर वर्ग के लोगों को आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। कमलनाथ ने ओबीसी के वोट तोड़ने के लिए यह सब किया था।

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