कुंदन कुमार, पटना। आज रविवार को महाष्टमी है और इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के इस खास मौके पर बिहार में महिलाएं मंदिरों और पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा को खोइछा भरने की रस्म निभाती हैं। इस परंपरा में महिलाएं नई साड़ी या कपड़े में सिंदूर, हल्दी, पान के पत्ते, मिठाई और श्रृंगार की दूसरी सामग्री बांधकर मां को अर्पित करती हैं।
निर्जला व्रत रहकर मां महागौरी की आराधना
बिहार में इस परंपरा का खास महत्व है। मान्यता है कि ये सब कुछ करने से परिवार में सुखी और संपन्नता आती है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है। ये खोईछा (नए कपड़े साथ बांधा सामान) मां के प्रतिमा के नीचे रखा जाता है। यह रस्म बिहार की लगभग सभी महिलाएं करती हैं और इस दिन वे पूर्ण रूप से निर्जला रहकर महागौरी की आराधना करती हैं।
अष्टमी के दिन मां महागौरी की होती है पूजा
नवरात्र की महाष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे और मां से सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। महाष्टमी पर कई घरों और मंदिरों में विशेष पूजन, आरती और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। पटना के प्रमुख देवी मंदिरों में आज अष्टमी पूजा अर्चना की जा रही हैं।
महानवमी कल, मां सिद्धिदात्री की होगी पूजा
कल सोमवार (19, अक्टूबर) को शारदीय नवरात्रि की महानवमी मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री और मां दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी रूप की पूजा की जाती है। यह नवरात्रि का अंतिम और नौवां दिन होता है। महानवमी के दिन 9 कन्याओं (जिन्हें मां दुर्गा का रूप माना जाता है) का पूजन करने के साथ उन्हें भोजन कराया जाता है।
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