कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर सरगर्मी चरम पर है। महाठबंधन ने चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली और वोट चोरी के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसी कड़ी में आज (7 अक्टूबर) को पूरे बिहार के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार आक्रोश मार्च निकाला जा रहा है।

​पटना में पुतला दहन और नारेबाजी

​राजधानी पटना में इस आंदोलन का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। राजद कार्यालय के बाहर से कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का पुतला लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो… के तीखे नारे लगाए। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी इनकम टैक्स गोलंबर पहुंचे, जहां तीनों हस्तियों के पुतलों का दहन किया गया। विपक्ष का यह पूरा विरोध चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर हो रहा है।

​तेजस्वी यादव का बड़ा हमला

​नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को ही इस महागठबंधन आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा था कि एसआईआर की शुरुआत विशेष रूप से बिहार से की गई थी। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपए भेजे जाने के मामले में चुनाव आयोग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी संसाधनों और पैसों का इस्तेमाल कर मतदाताओं को सीधे तौर पर प्रभावित किया जा रहा था, तब चुनाव आयोग क्या कर रहा था? विपक्ष का कहना है कि उन्होंने पहले भी इन मुद्दों को उठाया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

​कल जिला मुख्यालयों और पटना में होगा बड़ा प्रदर्शन

​प्रखंड स्तर के इस प्रदर्शन के बाद कल यानी 8 अक्टूबर को आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा। इसके तहत राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। वहीं राजधानी पटना में महागठबंधन के सभी विधायक, तमाम जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता सप्तमूर्ति से लेकर लोकभवन तक एक विशेष मार्च निकालेंगे। इस संपूर्ण आंदोलन का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना और आगामी चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाना है।