दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल मशीनों की खरीद में हुए करीब 700 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। केस के मुख्य आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला को राउज एवेन्यू कोर्ट ने चार दिन की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की हिरासत में भेज दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने आरोपी को 29 सितंबर तक ACB की हिरासत में रखने का आदेश दिया है।

जांच एजेंसी को आरोपी से मामले से जुड़े तथ्यों और कथित खरीद प्रक्रिया को लेकर पूछताछ करनी है। राजीव कुमार को 24 सितंबर को अमेरिका से लौटते ही एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां ACB ने पूछताछ के लिए उसकी हिरासत मांगी। अदालत ने आरोपी को चार दिन की कस्टडी में भेज दिया।

आखिर मामला क्या है?

दरअसल, स्वास्थ्य विभाग की विजिलेंस टीम के डिप्टी डायरेक्टर ने शिकायत की थी कि अस्पतालों के लिए मेडिकल मशीनों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में CR रेडियो, बेहोशी के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन, एक्स-रे मशीन और अन्य जरूरी उपकरणों की खरीद में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। जांच के मुताबिक, आरोप है कि राजीव कुमार उर्फ रंगीला ने कथित तौर पर खरीद प्रक्रिया में ऐसा रास्ता निकाला, जिससे केवल 2 पोर्टेबल X-ray मशीनों के लिए जारी टेंडर के बावजूद 448 मशीनों की सप्लाई का ऑर्डर हासिल कर लिया गया। आरोप है कि अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में भी इसी तरह की अनियमितताएं की गईं। पूरा मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और मेडिकल मशीनों की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। कथित घोटाले की कुल रकम करीब 700 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ACB ने कस्टडी क्यों मांगी?

राउज एवेन्यू कोर्ट में ACB की ओर से पेश वरिष्ठ सरकारी वकील कुमार संजय ने कहा कि आरोपी मामले की शुरुआत में फरार हो गया था। उसे पकड़ने के लिए पहले लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया, इसके बाद गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। इसके बावजूद आरोपी के पेश नहीं होने पर उसे भगोड़ा घोषित करना पड़ा। ACB ने अदालत से कहा कि मामले की जांच के लिए राजीव कुमार से पूछताछ बेहद जरूरी है। जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि कथित घोटाले को किस तरह अंजाम दिया गया और इसमें कौन-कौन से सरकारी अधिकारी तथा निजी कंपनियां शामिल थीं। ACB के मुताबिक, आरोपी से यह भी पता करना जरूरी है कि कथित तौर पर घोटाले का पैसा कहां-कहां गया और उसका पूरा मनी ट्रेल क्या है। जांच एजेंसी टेंडर से जुड़ी उन फाइलों और अन्य दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी हासिल करना चाहती है, जो कथित तौर पर गायब हैं।

आरोपी के वकील ने रिमांड का किया विरोध

वहीं, आरोपी के वकील विक्रम सिंह पंवार ने ACB की रिमांड मांगने का विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। वकील ने कहा कि मामले से जुड़े सभी सबूत पहले से ACB के पास मौजूद हैं। ऐसे में उनके मुवक्किल को चार दिन की पुलिस रिमांड में रखने की जरूरत नहीं है और यह कानूनी रूप से उचित नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर हैं। अदालत ने कहा कि ACB ने रिमांड मांगने के जो कारण बताए हैं, वे पुलिस हिरासत के लिए जायज हैं। इसके बाद अदालत ने आरोपी की गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए उसे चार दिन की ACB कस्टडी में भेज दिया। आरोपी को 29 सितंबर तक हिरासत में रखा जाएगा।

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