Odisha Desk, भुवनेश्वर। ओडिशा सहित पूर्वी और दक्षिणी भारत में रेलवे बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में 9,450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 4 प्रमुख रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
स्वीकृत की गई कुल 410 किलोमीटर लंबी इन रेल परियोजनाओं में ओडिशा के दो बेहद महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं:
भद्रक-हरिदासपुर: 75 किलोमीटर लंबी चौथी रेलवे लाइन।
कटक-पारादीप (बड़ाबांध): 72 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेलवे लाइन।
इसके अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली 173 किलोमीटर लंबी खड़गपुर-भद्रक (राणिताल) चौथी लाइन और आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु के बीच गुम्मिडीपुंडी-गुडूर परियोजना को भी मंजूरी दी गई है।
4 राज्यों के 8 जिलों और 6,448 गांवों को मिलेगा लाभ
ये सभी प्रोजेक्ट्स ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ (PM Gati Shakti National Master Plan) के तहत तैयार किए जाएंगे। इनसे 4 राज्यों के 8 जिलों और लगभग 6,448 गांवों की करीब 60 लाख आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, ओडिशा के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटक स्थलों—जैसे भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, मां भद्रकाली मंदिर, धवलेश्वर मंदिर, सारला पीठ और ललितगिरि तक कनेक्टिविटी और आसान हो जाएगी।
कोयला और लौह अयस्क की ढुलाई होगी आसान
इन नई रेल लाइनों के निर्माण से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और स्टील जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल का परिवहन बेहद सुगम हो जाएगा। केंद्र सरकार के अनुसार, इस क्षमता विस्तार से प्रति वर्ष 76 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। इसके अलावा, रेल परिवहन बढ़ने से लगभग 13 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी, जो लगभग 2.6 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
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