रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मामले में मंगलवार को पांच आरोपियों की जमानत याचिका पर अहम सुनवाई हुई। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते, श्वेता गुप्ता, अभय तिवारी, सुमन सौरव और उमेश कुमार की ओर से दाखिल बेल पिटिशन पर सुनवाई की गई।

इस दौरान मामले की जांच कर रही CID ने करीब 1000 पन्नों की केस डायरी अदालत में पेश की। बताया जा रहा है कि इसमें जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज, आरोपियों से पूछताछ और जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का विवरण शामिल है।

2 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

मंगलवार की सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 2 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। अब उस दिन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दोनों पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे।

आरोपियों की ओर से जहां जमानत देने की मांग की जा रही है, वहीं CID केस डायरी में दर्ज तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के सामने रख रही है।

14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ा है मामला

JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा समेत आयोग की अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद इसकी जांच CID को सौंपी गई थी। जांच के दौरान तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते, उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और TDPL से जुड़े अभय तिवारी समेत कई लोगों की भूमिका जांच के घेरे में आई।

CID परीक्षा प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है। इसमें OMR शीट की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग, परीक्षा परिणाम तैयार करने और परीक्षा संचालन से जुड़े बिंदु शामिल हैं।

पैसे लेकर सेटिंग और OMR टेंपरिंग के आरोप

जांच एजेंसी कथित तौर पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा में सेटिंग कराने और OMR शीट में छेड़छाड़ किए जाने के आरोपों की भी जांच कर रही है। एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों से संपर्क और कथित परीक्षा सेटिंग के नेटवर्क को लेकर भी पूछताछ की गई है।

पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से CID कई दौर में पूछताछ कर चुकी है। वहीं श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी से भी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल-जवाब किए गए हैं।हालांकि, जांच में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। दोष या निर्दोष होने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

अब 2 सितंबर को तय होगी जमानत की दिशा

करीब 1000 पन्नों की केस डायरी कोर्ट में पेश होने के बाद अब सभी की नजर 2 सितंबर की सुनवाई पर है। अदालत केस डायरी में दर्ज तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। इसके बाद पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।