कुंदन कुमार/पटना। राजधानी के मनेर इलाके में हुए पुलिस एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। इस घटना पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य की सम्राट चौधरी सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने बिहार में बढ़ती एनकाउंटर संस्कृति को तत्काल बंद करने की मांग करते हुए इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की अपील की है। रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में कहा कि मनेर में हुआ यह पुलिस एनकाउंटर बिहार में कानून के राज के दावों पर एक काला धब्बा है और सम्राट सरकार द्वारा जारी पुलिसिया दमन का एक और उदाहरण है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अपराधियों को सजा देने का काम अदालत का है, लेकिन पुलिस एनकाउंटर करवा कर मौजूदा सरकार देश के संविधान और मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग के माध्यम से निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त विधि-सम्मत कार्रवाई हो।
इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब मृतकों के परिजनों ने पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। परिजनों के अनुसार, पुलिस ने जिन तीनों लोगों (जेपी यादव, बबलू कुमार और राजा शर्मा) को पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार हत्याकांड का आरोपी बताकर ढेर किया है, उस हत्याकांड की मूल FIR में तीनों में से किसी का भी नाम दर्ज नहीं था। परिजनों का आरोप है कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या है।
गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह मनेर के शेरपुर गंगा घाट के पास बिहार एसटीएफ और पटना पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में इन तीनों को मार गिराया गया था। घटना के बाद अस्पताल में भारी बवाल और पथराव भी हुआ, जिसके बाद सांसद मीसा भारती ने भी पहुंचकर न्यायिक जांच की मांग का समर्थन किया है।

5 घंटे चला पोस्टमॉर्टम
मनेर इलाके में शुक्रवार तड़के पुलिस एनकाउंटर में मारे गए तीनों युवकों राजा शर्मा, बबलू कुमार यादव और जेपी यादव का देर रात पटना एम्स (AIIMS) में पोस्टमॉर्टम किया गया। जिलाधिकारी के आदेश पर गठित चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड द्वारा रात करीब 10 बजे पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू की गई, जो करीब 5 घंटे तक चली। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसकी बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। शनिवार तड़के करीब 3 बजे तीनों शव परिजनों को सौंप दिए गए।
एंबुलेंस किराए पर विवाद
दिन में दानापुर अस्पताल में हुए 5 घंटे के भारी हंगामे को देखते हुए पटना एम्स परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। फुलवारीशरीफ एसडीओ नारायण उपाध्याय ने खुद सुरक्षा की कमान संभाली। इस दौरान शास्त्रीनगर, खगौल, मनेर, दीघा, फुलवारीशरीफ, बेऊर और दानापुर समेत कुल 7 थानों की पुलिस पूरी रात तैनात रही। पोस्टमॉर्टम के बाद शव ले जाने के लिए एंबुलेंस के किराए को लेकर परिजनों और चालक के बीच विवाद हो गया। चालक ने प्रति शव 2,000 रुपये की मांग की, जिस पर परिजनों ने आपत्ति जताई। करीब एक घंटे की बातचीत के बाद एक ही एंबुलेंस से तीनों शव ले जाने पर सहमति बनी और सुबह करीब 5:30 बजे परिजन शवों को लेकर मनेर के लिए रवाना हुए।
20 मिनट चली मुठभेड़
मामले पर पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि मुठभेड़ करीब 20 मिनट तक चली थी। अपराधियों ने पुलिस टीम पर 24 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने 18 राउंड गोलियां चलाईं। इस गोलीबारी में मनेर थानाध्यक्ष रजनीश कुमार भी जख्मी हुए हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों मृतक पेशेवर शूटर थे और मौके से एक देशी पिस्टल व दो देशी कट्टे बरामद किए गए हैं। हालांकि, परिजन इसे लगातार फर्जी एनकाउंटर बता रहे हैं।

