Bihar News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर साल की तरह इस बार की दीपावली भी देश के जवानों के साथ मनाई। पीएम मोदी आज रविवार (8, नवंबर) छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे, जहां उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के साथ दीवाली मनाई। इस दौरान पीएम मोदी ने करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) ऑपरेशंस बेस का दौरा किया और अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। यह बेस बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड के रूप में काम करता था। जवानों के साथ पीएम मोदी के दिवाली सेलिब्रेशन पर राजद सांसद मनोज झा की प्रतिक्रिया सामने आई है।
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों के साथ दीवाली मना रहे हैं और उन्हें किसानों के साथ भी दीवाली मनानी चाहिए। इस देश की नींव हमारे जवान, किसान, छात्र, युवा और मजदूर हैं। हमें दीवाली के दिन यह संकल्प करना चाहिए कि प्रकाश का मतलब केवल एक दिन के लिए दीया जलाना न हो बल्कि बेरोजगारी के खिलाफ, सामाजिक सौहार्द, किसानों और मजदूरों के लिए दीया जलाने की प्रतिबद्धता पूरे साल होनी चाहिए।
वही सपा प्रमुख अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर मनोज झा ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट में मंदिर बनाने के अलग क्या-क्या बात कही गई थी? ये अखिलेश यादव से जवाब मांग रहे हैं? इनका (बीजेपी) आस्था पर कॉपीराइट नहीं है।
दिवाली के मौके पर बस्तर में जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, माओवादी आतंक, नक्सलवाद के खिलाफ यह लड़ाई आसान नहीं थी। एक समय था जब देश के करीब 20 राज्यों में 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद की चपेट में थे, नक्सलवाद से प्रभावित थे। शाम होने के बाद यहां जीवन ठहर जाता था। पीएम ने कहा कि, घरों से बाहर निकल नामुमकिन हो जाता था। लोगों से उनका वोट डालने का अधिकार भी इन नक्सलियों ने छीन लिया था। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, हजारों गांव, करोड़ों की आबादी, एक साल में दो-दो हज़ार तक नक्सली हमले, एक साल में 2000 हमले…2010 में यहीं पास ही दंतेवाड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में CRPF के हमारे 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। 2010 में ही, दंतेवाड़ा में ही एक और घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई थी। यह धरती हमारे वीरों के रक्त से अभिषिक्त हो गई थी। लेकिन महलों में रहने वाले किसी भी नामदार की सिसकी नहीं सुनाई दी। किसी भी महलों में रहने वाले नामदार की आंखों से एक बिंदु भी नहीं निकला था। आए दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहते थे।
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