गयाजी। देशभर के लोगों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और आसानी से लोन दिलाने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) और गयाजी साइबर थाने की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के एक मिनी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया है, जो गया शहर के डेल्हा थाना क्षेत्र के खरखुरा (अशोक नगर) में एक किराए के मकान से संचालित हो रहा था।

​कैसे हुआ पर्दाफाश और क्या हुई बरामदगी?

​सटीक खुफिया सूचना और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने मकान की घेराबंदी कर दो मुख्य आरोपियों अजीत कुमार (निवासी टिकारी) और दीपक कुमार (निवासी कुर्था, अरवल) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को देखकर दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें खदेड़कर दबोच लिया। मौके से पुलिस ने 11 स्मार्टफोन, 11 अतिरिक्त सिम कार्ड, एक लैपटॉप, चार्जर, दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक डेबिट कार्ड और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। इस सिलसिले में गयाजी साइबर थाने में औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया है।
​जांच में यह बात सामने आई कि यह गिरोह पिछले एक साल से इसी ठिकाने से सक्रिय था। एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और तकनीकी विश्लेषण के दौरान सीसीएसयू की टीम ने पाया कि देश के विभिन्न राज्यों से आ रही साइबर ठगी की शिकायतों में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल नंबरों का टावर लोकेशन और आईएमईआई नंबर इसी इलाके में सक्रिय था। डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक करने पर अशोक नगर के इस मकान की पहचान हुई।

​हाई-एंड गैजेट्स और डेटाबेस से होता था खेल

​पड़ताल में खुलासा हुआ कि शातिर अपराधी आईफोन एक्सआर, वनप्लस, विवो और सैमसंग जैसे महंगे और ब्रांडेड स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल कॉलिंग के लिए करते थे। ये आरोपी बैंक ग्राहकों को फोन कर खुद को बैंक प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद क्रेडिट कार्ड की लिमिट अपग्रेड करने या कम ब्याज पर लोन का झांसा देकर उनसे ओटीपी (OTP) और गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर उनके खाते साफ कर देते थे।
​जब्त किए गए मोबाइल और सिम कार्डों की जब एनसीआरपी पोर्टल पर जांच की गई, तो अलग-अलग राज्यों से 200 से अधिक शिकायतें दर्ज मिलीं। शुरुआती जांच में ही सैमसंग फोन पर 1.02 लाख और विवो फोन पर 37 हजार से अधिक की ठगी सीधे तौर पर जुड़ चुकी है, जबकि इस पूरे सिंडिकेट द्वारा कुल 1 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा, लैपटॉप से पीड़ितों का एक बड़ा डेटाबेस भी बरामद हुआ है, जिससे यह साफ होता है कि यह संवेदनशील डेटा किसी थर्ड-पार्टी वेंडर या अन्य माध्यम से लीक कराया गया था।

​साइबर अपराधियों का नेटवर्क

​नवादा और नालंदा जैसे ग्रामीण इलाकों में पुलिस की लगातार दबिश और सख्त कार्रवाई के बाद साइबर अपराधियों ने अपने काम करने का तरीका बदल लिया है। अब ये गिरोह जंगलों या गांवों के बजाय गयाजी और पटना जैसे बड़े शहरों की घनी रिहायशी कॉलोनियों को चुन रहे हैं। यहां वे छात्र या नौकरीपेशा बनकर किराए पर मकान लेते हैं और चुपचाप मिनी कॉल सेंटर चला
रहे हैं। गया के इस मामले में विभिन्न जिलों के युवकों का मिलना यह साबित करता है कि यह एक बड़ा अंतरजिला नेटवर्क है। घनी बस्तियों में दिनभर वाई-फाई और लैपटॉप पर चलने वाले इन अवैध अड्डों की भनक स्थानीय लोगों को भी नहीं लग पाती है। गौरतलब है कि साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस लगातार कड़े कदम उठा रही है।