पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। विकासखंड मैनपुर के जाड़ापदर में संचालित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मिली करोड़ों की सरकारी मदद का कथित दुरुपयोग सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक इस संस्था को वर्ष 2010 में ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा राशि पीपीपी के तहत दिए गए। मकसद था पांच ट्रेडों को अत्याधुनिक मशीनों से लैस करना और ग्रामीण युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण सुविधा देना।

राशि खर्च के लिए बनाई गई कमेटी ने 2016 में डीजल ट्रेड के नाम पर इंजन, बोलेरो और इससे जुड़े सामान पर करीब 50 लाख रुपये खर्च कर दिए। हैरानी की बात यह है कि डीजल ट्रेड उन पांच ट्रेडों की सूची में ही शामिल नहीं था, जिन्हें आधुनिक बनाने के लिए पैसा मिला था। नतीजा यह हुआ कि पिछले करीब 10 साल से ये सामान पड़े-पड़े अनुपयोगी हो चुके हैं। हैरानी की बात है कि प्रत्येक साल संस्थान में ऑडिट का प्रावधान है बावजूद अनियमितता उजागर नहीं हो पाना कई सवाल खड़ा कर रहा है।

संस्था के प्रभारी प्राचार्य संतोष कुमार ध्रुव ने बताया कि नियम के मुताबिक सहयोग राशि से संस्थान को आय अर्जित कर 20 साल के अंदर वापस भी करनी है। अब तक केवल 12.50 लाख की एक मात्र किश्त पटाई गई है। ट्रेड इफिलेशन के लिए प्रयास किया जा रहा है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मान्यता से चुका नाम

ग्रामीण युवा बेरोजगारों के लिए बहुउपयोगी संस्थान साबित होती पर संस्थागत चूक, अनियमितता और लापरवाही के चलते संस्था का विकास अवरुद्ध हो गया है। जिले का यह एक मात्र संस्थान है, जहां पर्याप्त उपक्रम के अलावा 5 ट्रेड को एनसीवीटी के तहत मान्यता मिली हुई है। इस संस्थान में वर्तमान में 400 से ज्यादा छात्र विभिन्न ट्रेडों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उपयोगिता के दृष्टिकोण से इस संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मान्यता सूची में शामिल करना था पर
अनियमितता के चलते मैनपुर के बजाए गरियाबंद को अब इस केंद्रीय अनुदान से मदद मिलने जा रहा है। आईटीआई की जिला नोडल धनेश्वरी पटेल ने कहा कि गरियाबंद आईटीआई से प्रपोजल भेज दिया गया है।

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