शब्बीर अहमद, भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा देश में हालिया विरोध प्रदर्शनों और ‘रिजीम चेंज’ के प्रयासों को लेकर दिए गए बयान पर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सबसे पहले भोपाल से लोकसभा सांसद आलोक शर्मा ने संघ प्रमुख के बयान का समर्थन करते हुए कड़ा रुख अपनाया, जिसके बाद कांग्रेस ने भी तीखा पलटवार करते हुए बीजेपी और संघ पर जोरदार हमला बोला है।
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सांसद आलोक शर्मा का समर्थन और राहुल गांधी पर तीखा वार
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित RSS के कार्यक्रम में फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा था कि कुछ ताकतें भारत में भी ‘रिजीम चेंज’ के प्रयास कर रही हैं लेकिन देश के मजबूत नेतृत्व के कारण उनके खेल बंद हो गए। इस बयान का पूर्ण समर्थन करते हुए भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कांग्रेस और हालिया प्रदर्शनों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के तार विदेशी फंडिंग से जुड़ रहे हैं।
सांसद ने दो-टूक कहा कि आंदोलन देश को तोड़ने के लिए नहीं बल्कि समाधान के लिए होने चाहिए। इस दौरान आक्रामक रुख अपनाते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि दशहरे के पावन पर्व पर राहुल गांधी रूपी रावण का अंत होना चाहिए और इनका पुतला जलाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जल्द आने वाले FCRA कानून से विदेशी फंडिंग को लेकर बड़ा पर्दाफाश होगा और कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब होगा।
सरकार आपकी है, तो जनता सड़कों पर क्यों उतर रही है: कांग्रेस
सांसद आलोक शर्मा और संघ प्रमुख के बयानों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि बार-बार हर वर्ग धरने पर क्यों बैठ रहा है और सड़कों पर क्यों आ रहा है? जिस प्रकार से सरकार के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती चली जा रही है, सरकार को उसके कारण खोजने चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि देश में सरकार आपकी है, इसलिए दूसरों पर आरोप मढ़ने के बजाय आप खुद जांच करवा लीजिए कि फंडिंग कहां से हो रही है। आरएसएस सिर्फ बीजेपी को बचाने का प्रयास कर रही है, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में करारा सबक सिखाएगी।
ज्ञानेश कुमार के पुतले दहन और चुनाव आयोग पर घेराबंदी
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों और पुतला दहन के मुद्दे पर भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया। विवेक त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि जब ज्ञानेश कुमार से सवाल पूछे जाते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी बचाव में क्यों उतर आती है? क्या बीजेपी अब निर्वाचन आयोग की आधिकारिक प्रवक्ता बन गई है?
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए पूरी बीजेपी सड़क पर उतरी हुई है। तंज कसते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने अपने एक मंत्री का इस्तीफा तो ले लिया, लेकिन ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं लिया, इससे साफ साबित होता है कि सरकार को सत्ता में लाने में ज्ञानेश कुमार की अहम भूमिका रही है।
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