LALLURAM EXCLUSIVE: राजधानी में नाक के नीचे बिना लाइसेंस के चल रहे 1000 से ज़्यादा हॉस्पिटल, क्लीनिक और लैब, सील करने में किससे खौफ खा रहा विभाग ?

सत्यपाल राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जैसे बड़े शहर जो प्रदेश के सभी ज़िलों के लिए मॉडल होता है. वहां के कार्यों से दूसरे जिला सीखते हैं, लेकिन हालात कुछ इस तरह जहां विभागीय अधिकारियों के कार्यालय है. जहां से योजनाओं का संचालन होता है. वहीं सबके नाक के नीचे अवैध तरीक़े से हॉस्पिटल, लैब और क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है. मरीज़ों से मनमाने ढंग से वसूली जारी है. स्वास्थ्य विभाग मौन है. स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी इन पर कार्रवाई करने से गुरेज कर रहे हैं. अफसरों को सब पता है बावजूद इसके कार्रवाई करने में खौफ खा रहे हैं.

LALLURAM.COM के पास मौजूद दस्तावेज़ के मुताबिक़ रायपुर में 1000 से ज़्यादा हॉस्पिटल क्लीनिक, लैब, अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं. इसमें से अधिकतम संस्थानों के पास ना तो फ़ायर सेफ़्टी का लाइसेंस है और न ही पर्यावरण की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद बेखौफ सब संचालित हैं. विभाग कार्रवाई करने से गुरेज खा रहे हैं.

अवैध संचालन
दस्तावेज के मुताबिक़ 600 हॉस्पिटल, लैब, क्लीनिकल के पास मान्यता नहीं है. साथ ही 400 हॉस्पिटल, लैब, क्लीनिकल का नवीनीकरण बाक़ी है. विभागीय जानकारी के मुताबिक़ मान्यता के मापदंड कमी के कारण मान्यता नहीं दी जा रही है.

ये हैं आंकड़े

  • संस्थान                        मान्यता            मान्यता नहीं
  • निजी हॉस्पिटल                 282                  182
  • पैथोलॉजी लैब                   200                  103
  • क्लीनिक                          777                   377

400 से ज़्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल, लैब, क्लिनिक जिनका सालों से नवीनीकरण नहीं हुआ है.

इस मामले में जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल ने कहा कि आवेदन मिलने पर ऑडिट कर मापदंड के अनुसार मान्यता दी जाती है. अवैध रूप से संचालन करने पर क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. रायपुर में लगभग 1300 है.  प्राइवेट हॉस्पिटल, लैब, क्लिनिक, पैथोलॉजी, डायग्नोस्टिक सेंटर है. 1300 में से 1000 प्राइवेट हॉस्पिटल, लैब, क्लिनिक, पैथोलॉजी, डायग्नोस्टिक सेंटर, जिनको मान्यता लेना है.

जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मीरा बघेल ने कहा कि मान्यता के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन मान्यता के मापदंड के अनुसार व्यवस्था नहीं है. किसी के पास फ़ायर सेफ़्टी का लाइसेंस नहीं है, तो किसी के पास पर्यावरण अनुमति ऐसे कई खामियां हैं, जिसकी वजह से मान्यता नहीं दी गई है.

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