सोहराब आलम, मोतिहारी। जिले के रघुनाथपुर इलाके में एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के शव के साथ जो हुआ, उसने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। हादसे के बाद न तो समय पर एंबुलेंस मिली और न ही पुलिस प्रशासन ने शव को सम्मानजनक तरीके से अस्पताल या परिजनों तक पहुंचाने की कोई उचित व्यवस्था की। इसके बजाय, एक बेबस परिवार को अपने अपने ही घर के चिराग के शव को एक जुगाड़ ठेला गाड़ी पर लादकर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना के अनुसार, रघुनाथपुर में हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस तरह की गंभीर दुर्घटनाओं के बाद अमूमन पुलिस या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वे तुरंत मौके पर पहुंचें और शव वाहन या एंबुलेंस के जरिए मृतदेह को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पोस्टमार्टम या परिजनों के सुपुर्द करें। हालांकि, इस मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की संवेदनहीनता साफ तौर पर देखने को मिली। प्रशासनिक मदद न मिलने के कारण मजबूरी में शव को एक जुगाड़ ठेला गाड़ी पर रखकर घटनास्थल से ले जाया गया, जो व्यवस्था के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है।
परिजनों का फूटा गुस्सा, किया जोरदार हंगामा
जब वह जुगाड़ ठेला गाड़ी शव को लेकर परिजनों के पास पहुंची, तो उनका आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। अपनों को खोने के गम के साथ-साथ प्रशासन के इस अमानवीय रवैये ने आग में घी का काम किया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने व्यवस्था के खिलाफ जमकर हंगामा किया। विरोध का यह तरीका इतना आक्रामक था कि आक्रोशित परिजन शव को दोबारा उसी हालत में वापस घटनास्थल पर ले गए और वहां जोरदार प्रदर्शन किया। उनका सीधा आरोप था कि एक गंभीर हादसे के बाद भी मृतक के शव को सम्मानजनक तरीके से ले जाने के लिए दो गज कफ़न या एक गाड़ी की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी।
तनावपूर्ण माहौल और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
इस घटना के बाद से रघुनाथपुर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। मौके पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा है और परिजनों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। लोग पुलिस और स्वास्थ्य प्रशासन के अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर एक मृतक व्यक्ति के साथ ऐसा अमानवीय सलूक क्यों किया गया। क्या बिहार में व्यवस्था इतनी लाचार हो चुकी है कि अपनों की अर्थी के लिए भी गरीबों को जुगाड़ का सहारा लेना पड़े? इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

