अजयारविंद नामदेव, शहडोल/अनूपपुर। देश में ईवीएम (EVM) को लेकर बहस और सियासी चर्चाएं लगातार सुर्खियों में हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश के शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले से EVM सुरक्षा को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अनूपपुर में पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस से 24 ईवीएम मशीनें गायब मिली हैं। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। अब सवाल सिर्फ मशीनों के गायब होने का नहीं, सवाल ये है कि इतनी संवेदनशील निर्वाचन सामग्री आखिर सुरक्षा के घेरे से बाहर कैसे हो गई?

अनूपपुर में पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने EVM वेयरहाउस से 24 मशीनें गायब मिली हैं। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल बताई जा रही हैं। जानकारी के मुताबिक, 20 अगस्त को ठेकेदार ने खुले में पड़ी EVM मशीनों की सूचना तत्कालीन SDM को दी थी। बताया गया कि SDM मौके पर पहुंचीं भी, लेकिन इसके बाद मशीनों को तत्काल सुरक्षित किए जाने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

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इसी दौरान वेयरहाउस की पिछली दीवार टूटे होने की बात भी सामने आई। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसी रास्ते से मशीनों को बाहर ले जाया गया हो सकता है। हालांकि मशीनें कब, कैसे और किसकी मौजूदगी में गायब हुईं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि 21 सितंबर को EVM मशीनों को पुराने परिसर से नए तहसील कार्यालय में शिफ्ट किया गया, इसके बाद 24 से 28 सितंबर के बीच हुए सत्यापन के दौरान 24 EVM मशीनें कम पाई गईं।

मामला सामने आने के बाद अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब गायब मशीनों के सीरियल नंबर, रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और वेयरहाउस से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मशीनें आखिरी बार कहां दर्ज थीं और वे कब से गायब हैं। फिलहाल EVM से छेड़छाड़ या चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसलिए इसे सीधे ‘EVM घोटाला’ कहना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। लेकिन निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा में कथित लापरवाही, पहले से दी गई सूचना और उसके बाद मशीनों के गायब होने की टाइमलाइन ने कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब जांच का असली सवाल यही है कि 24 ईवीएम मशीन आखिर गईं कहां, किसकी निगरानी में थीं और इतने संवेदनशील उपकरणों के गायब होने की जानकारी सत्यापन तक क्यों नहीं हुई? पुलिस जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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