(सुधीर दंडोतिया की कलम से)

नेतागिरी से छुटकारा मिला तो रहवासियों ने लपेट दिया

चुनाव से पहले ताबड़तोड़ हुए भूमिपूजन के बाद आचार संहिता लगते ही सड़क बनाने वाले ठेकेदार काफी खुश नजर आ रहे थे. ठेकेदार मानकर चल रहे थे, आचार संहिता लगने से नेतागिरी के साथ दूसरे दबाव पूरी तरह खत्म हो जाएंगे और मनमानी करने का जमकर मौका मिलेगा. अरेरा काॅलोनी में कुछ हद तक ऐसा हुआ भी कि गुणवत्ता की कमियों को लेकर रहवासी खुले में मैदान में उतर आए और ठेकेदारों से दो-दो हाथ कर बैठे. मतदाताओं का प्रेशर काम आया और आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर काम की गुणवत्ता में सुधार हुआ.

बैठकें वाले फुर्सत में

चुनाव से पहले अफसरों से दोस्ती वाली बैठकें करने वाले नेता अभी भी पूरी फुर्सत में हैं. इन नेताओं को इंतजार है कि मोबाइल की घंटी बजे या मोबाइल पर मैसेज टपके. मोबाइल पर काॅल भी आ रहे हैं और मैसेज भी, लेकिन इनमें बैठकों वाली चर्चा नहीं. ऐसे हाल किसी एक दल के नहीं बल्कि दोनों ही दलों के हैं. नेताजी पशोपेश में है कि चुनाव बाद जमावट वाले अफसरों ने आखिर अब तक खुलकर नजदीकियां क्यों नहीं बढ़ाई हैं.

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ऑल सोल्स डे का इंतजार

मध्य प्रदेश में सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा. इसका आकलन करने के लिए सबको ऑल सोल्स डे का इंतजार है. ऑल सोल्स डे यानी आत्माओं को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने वाला दिन. कैथोलिक ईसाइयों के लिए ऑल सोल्स डे दिवंगत आत्माओं को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने वाला दिन है. अब मध्य प्रदेश चुनाव में 2 नवंबर नाम वापसी की आखरी तारीख है. दरअसल टिकट न मिलने से बागी हुए बीजेपी और कांग्रेस के दर्जनों नेताओं ने निर्दलीय और दूसरे दलों में शामिल होकर नामांकन फाॅर्म भर दिए हैं. ऐसे में दोनों दलों का चुनावी गणित बिगड़ गया है. नाम वापसी की आखिरी तारीख पर कई नामांकन वापस होने के कयास लगाए जा रहे हैं. यानी ऑल सोल्स डे के दिन बहुत हद तक साफ हो जाएगा कि चुनावी बाजी मारने में कौन आगे निकल सकता है.

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जय वीरू में बढ़ी दूरियां

मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अपने दो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय को जय वीरू की जोड़ी बता रहे है. पिछले दिनों कुर्ता फाड़ सियासत के बीच टिकट बंटवारे को लेकर जय वीरू में दूरी बढ़ गई है. इसके पीछे की वजह कोलारस से विधायक वीरेंद्र रघुवंशी और शाजापुर से बंटी बना का टिकट है. कमलनाथ शिवपुरी से वीरेंद्र रघुवंशी को टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन दिग्विजय ने केपी सिंह को मैदान में उतारकर कमलनाथ को झटका दे दिया. इसके बाद कमलनाथ को वीरेंद्र रघुवंशी के समर्थकों को सफाई देनी पड़ी. अब दूसरी लिस्ट में शुजालपुर से दिग्विजय सिंह के समर्थक बंटी बना की जगह सज्जन सिंह वर्मा के खास रमवीर सिकरवार को टिकट मिला है. इस टिकट से दिग्विजय सिंह नाराज बताये जा रहे है. नौबत यहां तक है की सियासत के शोले के जय वीरू में अबोला की स्थित बनी हुई है.

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चर्चा जोरों पर है

बालाघाट में मंत्री गौरीशंकर बिसने पिछले दस साल अपनी बेटी को टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे थे. इस बार भाऊ बेटी को टिकट दिलाने सफल रहे, लेकिन अचानक भाऊ ने खुद अपना नामांकन दाखिल कर दिया. लोगों में चर्चा का विषय रहा कि आखिर बालाघाट में चुनाव मौसम बदला कैसे, इसके पीछे कारण सामने आया कि गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम बिसेन की तबियत खराब है. जिसकी वजह है बिसेन नहीं चाहते कि बेटी की जगह कोई और चुनाव लड़े और टिकट उनके परिवार से बाहर जाए. अब चर्चा जोरों पर है कि मौसम बिसेन की नासाज तबियत को देखते हुए बीजेपी गौरीशंकर बिसेन को ही अपना उम्मीदवार बना सकती है.

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