सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पुल निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने में खुलेआम डाका डालने की सनसनीखेज साजिश बेनकाब हुई है। मामला बैढ़न विकासखंड के चाचर से कुल्हनिया मार्ग पर म्यार नदी पर बने पुल का है। जहां अफसरों और ठेकेदार की सांठगांठ का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 7 लाख 37 हजार रुपये के अंतिम बिल को कूटरचना कर, रातों-रात 40 लाख 91 हजार रुपये बना दिया गया। यानी सीधे-सीधे करीब 33 लाख 53 हजार रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी और खेल सिर्फ रकम बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। काम में देरी और नियमों की अनदेखी के चलते अंकेक्षक ने निर्माण एजेंसी पर करीब 16 लाख 78 हजार रुपये की पेनाल्टी यानी कटौती तय की थी।

अब इस 16 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी से बचने के लिए क्या किया गया? नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज-माप पुस्तिका क्रमांक 605- को रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर दिया गया। यही नहीं, माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में खुलेआम ओवरराइटिंग और काट-छांट कर बैकडेट में संशोधित देयक तैयार कर दिया गया। इस पूरे मामले की शिकायत जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW रीवा तक पहुंची, तो जांच में इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं।

इन 4 लोगों पर FIR

EOW ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 4 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें सुशील कुमार मिश्रा – तत्कालीन एसडीओ, चंद्रशेखर तिवारी- तत्कालीन उपयंत्री, मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड – निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और एक अन्य आरोपी है। इन सभी पर आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

EOW एसपी ने कही ये बात

पुल का ठेका 574 लाख रुपये का था, काम में महीनों की देरी हुई और अंत में जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए दस्तावेजों तक में हेराफेरी कर दी गई। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में ईओडब्ल्यू पुलिस अधीक्षक अरविंद ठाकुर ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

ईओडब्ल्यू एसपी अरविंद ने बताया कि साल 2016 में सिंगरौली जिले की म्यार नदी पर पुल का निर्माण होना था, इसका निर्माण कार्य साल 2018 में पूरा होना था, लेकिन नहीं हो सका। इस पर विभाग ने 16 लाख की पेनाल्टी लगाई। इस पेनाल्टी को बचाने और ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए मेजरमेंट को गायब कर दिया गया और सरकारी माप मुस्तिका में कांट छांट की गई। साथ ही फाइनल बिल में कूटचरित किया गया। इस पर अपराध पंजीबद्ध कर जांच में लिया गया है।

EOW SP डॉक्टर अरविंद ठाकुर

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m