पटना। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बेहद आक्रामक और तीखा बयान दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आयोग पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है।

​मुख्य चुनाव आयुक्त पर भड़के मुकेश सहनी

​मुकेश सहनी ने तीखे शब्दों में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, अगर एक खून माफ होता, तो सबसे पहले ज्ञानेश को गोली मार देता। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष रूप से काम करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने लोकतंत्र की ताकत का हवाला देते हुए कहा कि व्यवस्था में अंतिम शक्ति हमेशा जनता के हाथ में होती है। सहनी ने आम जनता से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहें, क्योंकि सरकारों और नेताओं के कामकाज का सही मूल्यांकन केवल जनता के मुद्दों और धरातल पर किए गए विकास कार्यों के आधार पर ही होना चाहिए।

​जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं पर सरकार को घेरा

​बिहार के मौजूदा हालात पर बोलते हुए वीआईपी प्रमुख ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने जमुई और समस्तीपुर जिलों में नाबालिग बच्चियों के साथ हुई दर्दनाक घटनाओं का कड़ा संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया। सहनी ने इन घटनाओं को बेहद गंभीर बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और प्रशासन की विफलता का स्पष्ट प्रमाण हैं।

​बाढ़ संकट बनाम राजनीतिक उत्सव पर तीखा प्रहार

​बिहार में इस वक्त बाढ़ की विभीषण स्थिति पर बात करते हुए सहनी ने कहा कि राज्य के कई जिलों में लाखों लोग बाढ़ के कारण दाने-दाने को मोहताज हैं और भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार और उसके नुमाइंदे जश्न मनाने और उत्सव में व्यस्त हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए सरकार पर तंज कसा कि एक तरफ आम जनता बाढ़ और त्रासदियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी धन और संसाधनों का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक प्रचार-प्रसार के लिए किया जा रहा है।

​चुनावी घोषणाओं और शराबबंदी पर सवाल

​मुकेश सहनी ने आगामी और हालिया चुनावी वादों पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान महिलाओं के खातों में पैसे भेजने और मुफ्त बिजली जैसी लोकलुभावन घोषणाएं केवल मतदाताओं को लुभाने और प्रभावित करने का एक राजनीतिक हथकंडा मात्र थीं। इसके अलावा, राज्य में लागू शराबबंदी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि सरकार भविष्य में शराब की बिक्री को दोबारा शुरू करने का कोई निर्णय लेती है, तो समाज पर पड़ने वाले उसके नकारात्मक और सकारात्मक प्रभावों का बेहद गंभीरता से विश्लेषण होना चाहिए। उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि राज्य की गंभीर बेरोजगारी और बढ़ती अपराध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान सिर्फ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और एक पारदर्शी प्रशासन के जरिए ही संभव है।