कुमार उत्तम, मुजफ्फरपुर। जिले के चर्चित और ऐतिहासिक छाता बाजार पटाखा मंडी में शनिवार को जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ छापेमारी की। आजादी के समय से गरीब स्थान मंदिर के पास संचालित इस मंडी में कार्रवाई से दुकानदारों के बीच हड़कंप मच गया और कई दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए।
लाइसेंस नवीनीकरण का संकट
छाता बाजार मंडी में लगभग दो दर्जन दुकानें हैं, जिनके पास पटाखा बेचने के पुराने लाइसेंस मौजूद हैं। हालांकि, वर्ष 2017 के बाद से प्रशासनिक कारणों और घनी आबादी का हवाला देकर लाइसेंसों का नवीनीकरण रोक दिया गया है। तब से व्यापारी बिना नवीनीकरण के ही दुकानें संचालित करने को मजबूर हैं। हर साल दीपावली से पहले प्रशासन अवैध बिक्री के नाम पर छापेमारी कर कार्रवाई करता है, जिससे व्यापारियों में भारी रोष और चिंता का माहौल है।



भारी पुलिस बल के साथ हुई छापेमारी
एसडीओ पूर्वी और नगर एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने पूरी मंडी को घेरकर यह अभियान चलाया। हालांकि पुलिस ने 6 दुकानों की तलाशी लेकर भारी मात्रा में पटाखे ज़प्त किए, लेकिन कई दुकानदार शटर गिराकर भागने में सफल रहे। टाउन इंस्पेक्टर जयप्रकाश सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बिना वैध लाइसेंस के संचालन के खिलाफ की गई है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
व्यापारियों की समस्याएं
व्यापारियों का कहना है कि वे सीजनल कारोबार के तहत महाजन से ब्याज पर कर्ज लेकर पटाखे मंगाते हैं और दीपावली, छठ व शादियों के वक्त बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। पूर्व वार्ड पार्षद राजकुमार राजू ने बताया कि शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में होने के कारण प्रशासन ने लाइसेंस रोके हैं। इसके समाधान के लिए शहर से बाहर लदौरा और चैनपुर बांगरा नामक दो स्थानों को वैकल्पिक मंडी के रूप में चिन्हित किया गया था। पूर्व डीएम सुब्रतो कुमार सेन के कार्यकाल में लाइसेंस नवीनीकरण पर सहमति भी बनी थी, लेकिन उनके तबादले के बाद से यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई है, जिससे आज व्यापारियों को इस संकट का सामना करना पड़ रहा है।

