वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के वेना थाना क्षेत्र स्थित पैठना टोल प्लाजा के पास मंगलवार को टोल टैक्स की अत्यधिक दरों को लेकर बस संचालकों का भारी आक्रोश देखने को मिला। बिहारशरीफ-बख्तियारपुर हाईवे पर बस मालिकों और संचालकों ने अपनी बसें सड़क पर खड़ी कर पूरी तरह चक्का जाम कर दिया। सुबह 7 बजे से 10 बजे तक चले इस तीन घंटे के प्रदर्शन के कारण हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप रहा और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
भारी-भरकम टोल राशि से हो रहा है आर्थिक नुकसान
बिहारशरीफ-बख्तियारपुर बस परिचालक संघ के अनुसार, पैठना टोल प्लाजा पर प्रत्येक बस से 180 रुपये का टोल टैक्स वसूला जा रहा है। बार-बार इस मार्ग से गुजरने के कारण बस संचालकों की प्रतिदिन एक बड़ी रकम टोल के रूप में खर्च हो रही है, जिससे उनका व्यवसाय घाटे में चल रहा है।
संघ के अध्यक्ष विनय कुमार ने कड़ा विरोध जताते हुए बताया कि इसी जिले के सरमेरा स्थित अन्य टोल प्लाजा पर स्थानीय बसों से मात्र 35 से 40 रुपये शुल्क लिया जाता है, जबकि पैठना टोल प्लाजा पर इसके मुकाबले कई गुना ज्यादा यानी 180 रुपये वसूले जा रहे हैं। बस संचालकों ने इस मनमानी वसूली के खिलाफ न्यूनतम दर निर्धारित करने की पुरजोर मांग की है।



जिला प्रशासन को पहले ही दी गई थी चेतावनी
बस संचालकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी को पहले भी दो बार लिखित आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। संघ ने अपनी पूर्व चेतावनी के तहत 6 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन टोल प्लाजा जाम करने का निर्णय लिया था, जिसके तहत आज सुबह यह विरोध प्रदर्शन किया गया।
अधिकारियों का आश्वासन
सड़क जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर एडीटीओ शारदानंद राजू, सीडीपीओ-2 राकेश कुमार रंजन, रहुई के अंचल अधिकारी राजकमल के साथ भागन बीघा, वेना और चेरो थाना की पुलिस भारी दल-बल के साथ पहुंची।
अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए नाराज बस संचालकों को समझाया और उनकी मांगों को जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का पूरा आश्वासन दिया। इसके बाद जाम समाप्त कराया गया।
एडीटीओ शारदानंद राजू ने बताया कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और बस संचालकों की मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष रखकर उचित समाधान निकालने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय मांगा गया है।
NHAI का पक्ष
दूसरी ओर, NHAI के प्रतिनिधि आरके त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि शुरुआती नियमों के तहत बसों के लिए एक तरफ का शुल्क 360 रुपये तय किया गया था, जिसे बाद में 50 प्रतिशत की विशेष छूट के साथ घटाकर 180 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि टोल शुल्क का यह निर्धारण उनके स्थानीय स्तर पर नहीं होता, बल्कि मुख्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार ही राशि वसूली जाती है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग बस संचालकों की इस जायज मांग पर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं।

