वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के अस्थावां थाना क्षेत्र से जमीन विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने गांव में चर्चा तेज कर दी है। ग्रामीणों ने गांव के ही एक व्यक्ति पर दबंगई और करीब 4 डिसमिल जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी के खिलाफ खुलकर बोलने और उसका नाम लेने तक से लोग डरते हैं। लोगों को आशंका है कि विरोध करने पर उनके साथ भी कोई अनहोनी हो सकती है।
जमीन पर कब्जा करने का प्रयास
मामला अस्थावां थाना क्षेत्र के बस्ती गांव के सईया टोला का बताया जा रहा है। यहां बालेश्वर पासवान के नाम दर्ज करीब 4 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही मुकेश यादव द्वारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
ललिता देवी के अनुसार जमीन अस्थावां अंचल, अस्थावां हल्का और अस्थावां मौजा में स्थित है। उन्होंने जमीन की जमाबंदी संख्या 2284, भाग वर्तमान 1 और मौजा/थाना संख्या 179 होने की जानकारी दी। उनके मुताबिक जमाबंदी में रैयत का नाम बालेश्वर पासवान, पिता जंगली पासवान दर्ज है।
जमीन की नापी कराएगी प्रशासन
ललिता देवी का कहना है कि जमीन की रसीद लगातार कट रही है। इसके बावजूद जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद खड़ा हुआ। जमीन पर लगे तार और पेड़ को लेकर भी विवाद होने की बात सामने आई है। मामले की शिकायत के बाद जिला प्रशासन के आदेश पर सरकारी अमीन द्वारा जमीन की नापी कराए जाने की बात भी कही गई है।
वहीं, स्थानीय ग्रामीण शांति देवी, साहुल चंद्रवंशी, मुन्ना पासवान और सोनू कुमार समेत अन्य लोगों ने मुकेश यादव पर दबंग प्रवृत्ति का होने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि वे उसके खिलाफ खुलकर बोलने से डरते हैं और उन्हें किसी तरह के नुकसान की आशंका रहती है।
शव मिलने की घटना का भी दावा
ग्रामीणों ने पूर्व में सोनू राम से जमीन विवाद और उसके साथ मारपीट के बाद शव मिलने की घटना का भी दावा किया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामले के आधिकारिक रिकॉर्ड की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए इस आरोप की पुष्टि पुलिस या प्रशासनिक जांच के बाद ही मानी जा सकती है।
निष्पक्ष जांच कराने की मांग
वहीं, अस्थावां अंचल अधिकारी विनीता ने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार जमीन से संबंधित रसीद और कागजात ललिता देवी के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक दूसरे पक्ष की ओर से फिलहाल जमीन के स्वामित्व से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि जमीन की नापी कराई गई है और मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन पूरे अस्थावां क्षेत्र में जमीन से जुड़े मामलों की जानकारी भी जुटा रहा है।
फिलहाल ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जमीन के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने, वास्तविक स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच में जमीन की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए दबंगई के आरोपों पर पुलिस एवं प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। यह खबर ग्रामीणों के आरोप, उपलब्ध दस्तावेजों की जानकारी और प्रशासन के प्रारंभिक पक्ष पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
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