दिल्ली में इन दिनों वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम जारी है। इस दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल कई लोगों को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं। अब इन नोटिस के पीछे की एक बड़ी वजह सामने आई है। चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस में करीब 42 फीसदी नोटिस ऐसे मतदाताओं को भेजे गए हैं, जिनका नाम पिछली SIR के रिकॉर्ड से मैच नहीं हो रहा है। आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट SIR के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अगस्त को प्रकाशित की गई थी।

पुराने रिकॉर्ड से नाम मैच नहीं होने पर नोटिस

SIR की प्रक्रिया के दौरान मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नामों का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। जिन मतदाताओं की जानकारी पिछले SIR के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है, उनके दस्तावेज और पात्रता की पुष्टि के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम की पुष्टि करना और रिकॉर्ड को अपडेट करना है।

माता-पिता और बच्चों की उम्र में अंतर भी वजह

पिछली वोटर लिस्ट से नाम का मिलान नहीं होना नोटिस जारी करने की प्रमुख वजहों में शामिल है। इसके अलावा माता-पिता और बच्चों की उम्र में असामान्य रूप से ज्यादा या कम अंतर पाए जाने पर भी नोटिस भेजे गए हैं। हालांकि, 59,791 नोटिस ऐसे भी हैं, जिनमें अंतर का कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से अपलोड की गई नोटिस पाने वाले लोगों की सूची के विश्लेषण से ये रुझान सामने आए हैं। सूची से यह भी पता चलता है कि करीब 4 फीसदी लोगों को एक से अधिक कारणों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस पाने वालों में 125 साल का व्यक्ति भी

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से जारी सूची में नोटिस पाने वाले लोगों की उम्र को लेकर भी एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। सूची के मुताबिक, नोटिस पाने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र 125 साल दर्ज है। SIR के तहत मतदाता रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, ऐसे में उम्र या पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों वाले मामलों की भी जांच हो रही है।

विधानसभा क्षेत्रों में नोटिस पाने वालों के आंकड़े अलग-अलग

दिल्ली के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल लोगों के मुकाबले नोटिस पाने वाले मतदाताओं के प्रतिशत में भी काफी अंतर देखने को मिला है। मटिया महल विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट सूची में शामिल लोगों में से 22.7 फीसदी को नोटिस भेजा गया है, जबकि बदरपुर में यह आंकड़ा 44.2 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक, नोटिस पाने वाले कुल 33.1 लाख लोगों में से 31.1 लाख यानी करीब 94 फीसदी मामलों में सिर्फ एक कारण दर्ज किया गया है। वहीं, करीब 4 फीसदी लोगों के मामले में एक से अधिक कारण बताए गए हैं।

94 फीसदी मामलों में सिर्फ एक कारण

चुनाव आयोग की ओर से दिल्ली में 33.1 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 31.1 लाख यानी करीब 94 फीसदी लोगों के मामले में नोटिस का सिर्फ एक कारण बताया गया है। इनमें 13.8 लाख लोग ऐसे हैं, जिनका नाम पिछली SIR के रिकॉर्ड से मैप नहीं हुआ है। ये सभी उन 31.1 लाख मामलों में शामिल हैं, जिनमें सिर्फ एक कारण दर्ज किया गया है।

कुछ मामलों में एक से ज्यादा गड़बड़ियां

जिन मामलों में रिकॉर्ड में एक से अधिक तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं, वहां नोटिस में एक से ज्यादा कारण भी दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 1.28 लाख नोटिस में दो कारण, जबकि लगभग 9,000 नोटिस में तीन कारण बताए गए हैं। वहीं, 400 से अधिक मामलों में चार कारण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, 59,791 लोगों को भेजे गए नोटिस में कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है। इससे पता चलता है कि SIR के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह की विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m