नारनौल। जलभराव की समस्या से निपटने के लिए खरीदे गए वाटर पंपों और लंबे समय से बकाया प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर नगर परिषद नारनौल ने सख्त रुख अपनाया है। नए वाटर पंपों की जगह पुराने पंप भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद नगर परिषद ने पूरी खेप कंपनी को वापस भेज दी। वहीं, 10 लाख रुपये से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स बकाया रखने वाले 29 भवन मालिकों पर भी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

नगर परिषद के ईओ जोगेंद्र सिंह कालीरमन ने बताया कि शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नए वाटर पंप मंगवाए गए थे। जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित कंपनी ने नए पंपों की जगह पुराने पंप भेज दिए। नगर परिषद ने इन पंपों को स्वीकार करने के बजाय कंपनी को वापस भेज दिया है। ईओ के अनुसार, संबंधित कंपनी को डिबार/ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई है और अब नगर परिषद उससे कोई सामान नहीं खरीदेगी।

इधर, प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली को लेकर भी नगर परिषद ने सख्ती बढ़ा दी है। ईओ ने बताया कि नारनौल नगर परिषद क्षेत्र में करीब 29 ऐसी बिल्डिंग हैं, जिन पर 10 लाख रुपये से ज्यादा का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। इन बड़े बकायेदारों से टैक्स की वसूली के लिए कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। नगर परिषद ने सभी बकायेदारों से अपील की है कि वे अपना बकाया प्रॉपर्टी टैक्स जल्द जमा कर दें, ताकि कानूनी कार्रवाई की नौबत न आए।

नगर परिषद की इस कार्रवाई से साफ है कि शहर में सरकारी सामान की खरीद से लेकर टैक्स वसूली तक किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि नगर परिषद की सख्ती के बाद 10 लाख रुपये से ज्यादा टैक्स बकाया रखने वाले बड़े बकायेदार समय पर भुगतान करते हैं या नहीं।

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