पंजाब/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से रोड रेज मामले में मृतक के परिजनों की याचिका पर जवाब मांगा है. याचिका में सजा में वृद्धि का अनुरोध करते हुए कहा गया है कि नवजोत सिद्धू को गंभीर श्रेणी के अपराध के लिए दंडित किया जाना चाहिए. सिद्धू ने शीर्ष अदालत से 1988 के रोड रेज मामले में जेल की सजा नहीं देने का अनुरोध किया है, जिसमें उन्हें एक हजार रुपये के मामूली जुर्माने के साथ छोड़ दिया गया था.

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गुरनाम सिंह के परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने प्रस्तुत किया कि उन्होंने जारी नोटिस के दायरे को बढ़ाने के लिए एक आवेदन दिया है. लूथरा ने जस्टिस एएम खानविलकर और एसके कौल की पीठ के समक्ष कहा कि पीड़ित को एक चोट पहुंचाई गई थी और कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकने) के कारण हुई मौत सही नहीं है. इस पर पीठ ने पूछा कि आप समीक्षा की मांग कर रहे हैं, इस लिहाज से तो आप फैसले की पूरी समीक्षा की भी मांग कर रहे हैं. आप चाहते हैं कि हम सबूतों पर फिर से गौर करें.

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पीठ ने लूथरा से कहा कि वह नोटिस का दायरा बढ़ाना जारी नहीं रख सकते. सिद्धू का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने तर्क दिया कि घटना के संबंध में 4 साल बाद फैसले की समीक्षा करने के लिए, जो कि 1988 में हुई थी, खासकर अगर नोटिस को प्रतिबंधित कर दिया गया है, इसे देखते हुए और समीक्षा का दायरा नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा कि अदालत सबूतों का विश्लेषण करने के बाद किसी नतीजे पर पहुंची है और यह ऐसा मामला नहीं है, जहां उनके मुवक्किल मृतक की मौत का कारण बने हों.

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पीठ ने स्पष्ट किया कि नोटिस सर्कुलेशन पर जारी किया गया था न कि पक्षों को सुनने के बाद. चिदंबरम ने अपने मुवक्किल के खिलाफ सबूतों की और जांच का विरोध करते हुए कहा कि समीक्षा याचिका का दायरा बहुत सीमित है. दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने सिद्धू से जवाब मांगा और मामले को दो हफ्ते बाद आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया. शीर्ष अदालत अपने 2018 के फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रोड रेज की घटना में सिद्धू की सजा को 3 साल के कारावास से घटाकर 1,000 रुपये कर दिया गया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी.