कुंदन कुमार, पटना। बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाले ‘जीविका’ कार्यक्रम के 20 साल पूरे होने पर जदयू इसे ‘नीतीश संवाद’ के रूप में मना रही है। इस मौके पर पटना स्थित पार्टी कार्यालय आज शुक्रवार 2 अक्टूबर को ‘नीतीश संवाद-20 साल बेमिसाल, जीविका दीदी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में भारी संख्या में जीविका दीदियों का महाजुटान हुआ, जाहं नीतीश संवाद के जरिए महिलाओं के आर्थिक बदलाव और उनकी सफलताओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में निशांत कुमार समेत पार्टी के अन्य कई बड़े नेता मौजूद रहे।

निशांत कुमार ने पिता नीतीश का किया जिक्र

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान जदयू नेता निशांत कुमार ने कहा कि, हमारे पिताजी (नीतीश कुमार) ने राज्य में महिला के कल्याण को लेकर लगातार कई कार्यक्रम चलाए हैं। वर्ष 2006 में जीविका की शुरुआत की गई थी, जिससे लाखों महिलाएं आज आत्मनिर्भर हुई हैं, चाहे वह लड़कियों को फ्री में साइकिल देने की योजना हो, चाहे वह महिलाओं को उद्योग लगाने के लिए योजना हो सब की शुरुआत हमारे पिताजी ने की थी और बिहार में लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं।

निशांत ने कहा कि, आगे भी निश्चित तौर पर इस तरह का कार्यक्रम को हम लोग लगातार करते रहेंगे, जिससे राज्य की महिलाएं मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि, बिहार में शराबबंदी भी महिलाओं के मांग पर ही हमारे पिताजी ने लागू किया था। निश्चित तौर पर इससे समाज के माहौल भी बदले हैं।

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का बयान

वहीं, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि, जीविका के माध्यम से महिलाओं को सशक्त करने को लेकर जो काम हमारे नेता पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। वह काम अभी भी चल रहा है और इससे गांव के महिलाओं का लगातार कल्याण हो रहा है। महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं और आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा कि बिहार के गरीब पिछड़ा अति पिछड़ा समाज की जो महिला है, उन्हें आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास हम लोग के द्वारा किया जा रहा है। जीविका एक बड़ा माध्यम था, जिसकी शुरुआत हमारे नेता नीतीश कुमार ने की थी। 20 साल में एक करोड़ से ज्यादा जीवित दीदी आत्मनिर्भर हुई हैं।

बता दें कि बिहार में जीविका परियोजना की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़कर उन्हें बचत, बैंक ऋण और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना था। इसकी शुरुआत उस समय केतत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी।

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