Dharm Desk – रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और सुरक्षा का पावन पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा- सूत्र बांधकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। सनातन परंपरा में राखी बांधने की यह रस्म केबल भाई-बहन तक सीमित नहीं मानी गई है, बल्कि सबसे पहले देवी-देवताओं का आर्शीवाद लेने की परंपरा भी रही है। धार्मिक मान्यताओं व शास्त्रीय विधान के अनुसार, भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले भवागन को रक्षा-सूत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

सबसे पहले भगवान गणेश को अर्पित करें राखी

किसी भी शुभ कार्य का आरंभ प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा से किया जाता है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले गणेशजी को राखी अर्पित कर उनसे विघ्न-बाधाओं को दूर करने और परिवार में मंगल बनाए रखने की प्रार्थना करें।

भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें रक्षा-सूत्र

भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच भाई-बहन जैसे स्नेह और रक्षा का संबंध सनातन परंपरा में विशेष रूप से स्मरण किया जाता है। इसलिए गणेश जी के बाद श्री कृष्ण को राखी अर्पित कर उनके चरणों में भाई-बहन के रिश्ते की सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

कुलदेवी-कुलदेवता का लें आशीर्वाद

इसके बाद अपने कुलदेवी और कुलदेवता को रक्षा-सूत्र अर्पित करना चाहिए। परिवार और वंश की रक्षा करने वाले कुलदेवता-कुलदेवी का स्मरण कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। इसके बाद ही भाई, परिजन या प्रिय जनों की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा मानी जाती है।

राखी बांधने के 3 शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय का विशेष महत्व होता है। दिए गए मुहूर्त के अनुसार बहनें इन तीन समयों में राखी बांध सकती हैं।

  1. प्रातःकाल: सुबह 5:58 बजे से 9:48 बजे तक
  2. अभिजीत/दोपहर: दोपहर 12:05 बजे से 1:15 बजे तक
  3. सायंकाल: शाम 4:05 बजे से 5:30 बजे तक

इन शुभ समयों में विधि-विधान से रक्षासूत्र बांधकर भाई-बहन एक-दूसरे के सुख, आरोग्य, समृद्धि और दीर्घायु की कामना कर सकते हैं। रक्षा बंधन पर पहले भगवान को राखी अर्पित करने और फिर भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधने से पर्व की धार्मिक परंपरा पूर्ण मानी जाती है।