गुजरात के वडोदरा में फर्जी डॉक्टर बनकर करीब 15 साल तक मरीजों का इलाज करने का कथित मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, अकोटा इलाके में ‘प्रमिला क्लिनिक’ चलाने वाला 45 वर्षीय बिस्वजीत प्रफुल्ल हलदर सिर्फ 10वीं कक्षा तक पढ़ा है। इसके बावजूद वह मरीजों को एलोपैथिक दवाएं लिखने, इंजेक्शन लगाने और बवासीर की सर्जरी करने तक का काम करता था।

मरीजों को दवाओं के असर पर हुआ शक

पुलिस के अनुसार, कुछ मरीजों को शक हुआ कि आरोपी की दी हुई दवाएं अपेक्षित असर नहीं कर रही हैं। इसके बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा शुरू हुई और मामला पुलिस तक पहुंचा। सूचना मिलने पर वडोदरा सिटी पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच, जोन-2 ने मेडिकल अधिकारी की मौजूदगी में क्लिनिक पर छापा मारा और हलदर को गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी डिग्री के सहारे कर रहा था प्रैक्टिस

पुलिस का आरोप है कि हलदर ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और BIAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की कथित फर्जी डिग्री के आधार पर खुद को डॉक्टर बताया। वह मरीजों का इलाज करने के साथ बवासीर और हेमोरॉयड्स की सर्जरी भी करता था। पुलिस के मुताबिक, वह बिना एनेस्थीसिया गर्म चिमटे से सर्जरी करता और इसके लिए मरीजों से 25 हजार रुपये तक वसूलता था।

क्लिनिक से भारी मात्रा में मेडिकल सामान जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 41 हजार रुपये कीमत का मेडिकल सामान बरामद किया। इसमें कफ सिरप की 38 बोतलें, 162 इंजेक्शन, दवाओं की 281 स्ट्रिप, 84 ट्यूब, 30 पाउडर वाली दवाएं, 32 कैप्सूल, 9 IV फ्लूइड की बोतलें और 19 इन्फ्यूजन सेट समेत अन्य सामग्री शामिल है।

डॉक्टर के क्लिनिक में हेल्पर था आरोपी

पुलिस के अनुसार, हलदर ने पश्चिम बंगाल में एक डॉक्टर के क्लिनिक में हेल्पर के तौर पर काम किया था। करीब 15 साल पहले वह वडोदरा आया और कथित तौर पर डॉक्टर बनकर क्लिनिक चलाने लगा। पुलिस को आशंका है कि हेल्पर के दौरान उसने आम दवाओं और इलाज की प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल की होगी।

अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि उसने कितने मरीजों का इलाज किया, कौन-कौन सी दवाएं और इंजेक्शन दिए और इस कथित फर्जी प्रैक्टिस से कितनी कमाई की। पुलिस उसकी कथित अवैध कमाई से जुड़ी कानूनी कार्रवाई की भी जांच कर रही है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m