केंद्र सरकार ने हाल ही में UPI पर MDR चार्ज लगाने का ऐलान कर दिया है। 2000 रुपए से ज्यादा का भुगतान करने पर 0.40 फीसदी शुल्क वसूला जाएगा। इस फैसले का असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। भोपाल में एक तरफ जहां व्यापारियों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। वहीं दूसरी तरफ इंदौर में भी इसका विरोध करने के लिए दुकानों पर पोस्टर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

भोपाल के कारोबारी चिंता में

संजय पाटीदार, भोपाल। 15 अक्टूबर 2026 से 2 हजार रुपये से अधिक के निर्धारित मर्चेंट यानी दुकान या कारोबारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होगा। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट यानी भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारी से लिया जाएगा। 2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेट डिस्काउंट रेट) शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भोपाल के व्यापारियों में चिंता है। 

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सरकार और बैंकों ने पिछले कई वर्षो में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। व्यापारियों ने भी इसे अपनाकर अपने कारोबार में यूपीआई को रोजमर्रा के लेनदेन का हिस्सा बनाया है। अब बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से खासकर कम मार्जिन वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ कारोबारी बड़े यूपीआई भुगतान के बजाय नकद भुगतान लेने या भुगतान को अलग-अलग हिस्सों में करने का आग्रह कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की सहजता प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि जब डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए यह आसान और किफायती बना रहे। 

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने कहा कि सूचना सामने आने के बाद शहर के कई व्यापारियों ने चैंबर से संपर्क कर अपनी चिंता बताई है। उनका कहना है कि व्यापारी डिजिटल और कैशलेस अर्थव्यवस्था के साथ हैं लेकिन नए शुल्क का असर सीधे कारोबार की लागत पर पड़ेगा।देवनानी ने कहा कि 0.4 प्रतिशत शुल्क पहली नजर में कम दिखाई देता है लेकिन बड़े लेनदेन में इसकी राशि बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 75 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर करीब 300 रुपये शुल्क बनेगा। ऐसे कई डिजिटल लेनदेन रोज होने पर महीने में व्यापारी पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ सकता है। 

उन्होंने कहा कि कई कारोबार ऐसे हैं जिनका मुनाफा मार्जिन ही बहुत कम है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त लागत भी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।अजय देवनानी ने कहा कि भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों की चिंता को मध्यप्रदेश और केंद्रीय स्तर पर उठाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री और मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री को ईमेल के माध्यम से व्यापारियों की परेशानी से अवगत कराया जाएगा। साथ ही उनसे प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने का आग्रह किया जाएगा। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए। किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले व्यापारियों से चर्चा की जाए ताकि डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी बनी रहे और कारोबारियों की लागत भी अनावश्यक रूप से ना बढ़ सके। 

भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक यूपीआई भुगतान आज व्यापार व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर भी मोबाइल से तुरंत भुगतान हो जाता है और व्यापारी को छुट्टे पैसे की समस्या भी नहीं रहती।उन्होंने बताया कि 5 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर 20 रुपए, 10 हजार पर 40 रुपए और 50 हजार रुपए के भुगतान पर 200 रुपए शुल्क बनेगा। दिनभर में कई बड़े डिजिटल भुगतान होने पर यह राशि महीने के अंत तक काफी बढ़ सकती है। कम मार्जिन वाले किराना और दूसरे कारोबार में इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है। 

इंदौर में 18 सितंबर से दुकानों पर लगेंगे पोस्टर 

हेमंत शर्मा, इंदौर। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों की नाराजगी अब बाजारों में नजर आएगी। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने 18 सितंबर 2026 से शहर की अलग-अलग दुकानों पर ‘UPI पर मर्चेंट फीस का विरोध’ लिखे पोस्टर लगाने का निर्णय लिया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के मुताबिक, डिजिटल भुगतान आज व्यापार का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में UPI लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका असर सीधे व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ सकता है। इसी चिंता को सरकार तक पहुंचाने के लिए पोस्टर अभियान शुरू किया जा रहा है।

अक्षय जैन ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंताओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का प्रयास है। पोस्टरों के जरिए ग्राहकों को भी प्रस्तावित मर्चेंट फीस और उसके संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।

एसोसिएशन का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए हर डिजिटल भुगतान पर लगने वाला शुल्क कारोबार की लागत बढ़ा सकता है। वहीं, ग्राहकों के लिए भी भुगतान व्यवस्था में अतिरिक्त आर्थिक बोझ की स्थिति बन सकती है। 18 सितंबर से शुरू होने वाले इस अभियान के जरिए UPI शुल्क का मुद्दा बाजारों में उठाया जाएगा। एसोसिएशन ने व्यापारियों से पोस्टर मुहिम में शामिल होने की अपील की है।

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