बड़ी लापरवाही : खरीदी केंद्रों से नहीं हुआ धान का उठाव, अब बारिश से हो गया खराब, अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर की मांग…

रोहित कश्यप ,मुंगेली। जिले के धान खरीदी केंद्रों में अभी तक धान का उठाव नहीं हो पाया है. स्थिति ये है 89 उपार्जन केंद्रों में से 17 केंद्रों में जीरो शार्टेज है वही बाकी सभी केंद्रों में बड़ी मात्रा में शार्टेज है. समिति में अभी भी 68 हजार क्विंटल से भी अधिक धान पड़ा हुआ है. समय पर धान का उठाव नहीं होने और लगातार हो रही बारिश से धान खराब हो गया है. धान के खराब होने से शॉर्टेज की भरपाई के लिए धान खरीदी के कर्मचारी और विपणन विभाग के अधिकारी आमने-सामने है. एक तरफ जहां समिति के कर्मचारियों का कहना है कि 72 घंटे के भीतर धान का उठाव कराने विपणन विभाग द्वारा अनुबंध किया गया था, लेकिन 6 माह गुजर जाने के बाद भी केंद्रों से धान का परिवहन नहीं हुआ है.

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ऐसे में खराब धान की शार्ट की भरपाई की जिम्मेदारी विपणन विभाग की है. तो वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के द्वारा कर्मचारियों पर शॉर्टेज की भरपाई के लिए दबाव बनाया जा रहा है और शॉर्टेज की भरपाई नहीं करने पर जिले के तीन धान खरीदी प्रभारियों पर एफआईआर दर्ज भी कर लिया गया है. यही वजह है कि समिति के कर्मचारियों द्वारा जिला विपणन विभाग के अधिकारी डीएमओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है.

ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों पर की जाने वाली कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और केंद्रों में रखे धान का तत्काल परिवहन कराया जाए. इसके अलावा जिला विपणन अधिकारी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाए. वहीं कर्मचारियों पर दर्ज हो चुकी एफआईआर तत्काल वापस लिया जाए. कर्मचारियों का यह भी कहना है प्राकृतिक आपदा के कारण धान खराब हुआ है, इसके समिति में रखे धान का बीमा भी कराई जाती और प्राकृतिक आपदा से धान खराब हो जाने पर बीमा कंपनी द्वारा क्षति पूर्ति दी जाती है, लेकिन मुंगेली जिले में बीमा का कहीं अता पता नहीं है.

इधर, डीएमओ उपेंद्र पाटले से लेकर कलेक्टर पीएस एल्मा का कहना है कि समितियों को धान के रख-रखाव के लिए पर्याप्त फंड दिए जाते हैं. इसके बाद भी धान खराब हुआ है तो इसके लिए समिति कर्मचारी जिम्मेदार होंगे. कर्मचारियों ने कहा है कि समिति अपने स्तर पर उठाव कराने आर्थिक रुप से सक्षम नहीं है. सत्र 2013-14 में सिलदहा समिति ने जो परिवहन कराया है उसका भुगतान आज तक नहीं हुआ है.

जिले के 43 समितियों में 30 समिति घाटे पर चल रही है, जिससे समिति के कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ जाते हैं. ऐसे में समिति परिवहन कैसे करेगी. वहीं 2017-18 जीरो शार्टेज वाले 13 समितियों को आज तक उनके कमीशन की राशि अप्राप्त है. अब बड़ा सवाल ये की शॉर्टेज की भरपाई के लिए समितियों पर एफआईआर दर्ज तो कराई जा रही है जबकि धान का परिवहन कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले विपणन विभाग के अधिकारियों को बख्शा जा रहा है जिस पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

समिति कर्मचारियों ने मांग पूरी नहीं होने पर जिले के 43 केंद्रों में 6 जुलाई से काम बंद की चेतावनी दी है. वहीं बड़ा सवाल यह भी है कि क्या समितियों में रखे खराब धान की भरपाई का जिम्मा सिर्फ समिति की होगी. उठाव के लिए समितियों की तरफ से विपणन विभाग को हजारों पत्र लिखे गए. साथ ही एआरसीएस के द्वारा दर्जनों पत्र विपणन विभाग को दिए गए. अमूमन विपणन विभाग ने भी परिवहन ठेकेदार को पत्र लिखकर उठाव के लिए कहा है, बावजूद इसके समय पर उठाव नहीं होने से लगभग 50 हजार से ऊपर के धान बर्बाद हो गए है.

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