फरीदाबाद/पलवल। पलवल की राजनीति में इन दिनों एक कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है— ‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठमलट्ठा’। हरियाणा विधानसभा चुनाव में अभी करीब तीन साल का लंबा वक्त बाकी है, लेकिन पलवल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो युवा नेताओं ने अभी से अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत दिखानी शुरू कर दी है। दीपावली की शुभकामनाएं देने के बहाने बुधवार शाम राज्य के खेल राज्यमंत्री व स्थानीय विधायक गौरव गौतम और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के भतीजे उत्कर्ष चौधरी ने अलग-अलग रोड शो निकाले।
इस घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि दोनों रोड शो का शुरुआती स्थान एक ही था और उनका रूट भी लगभग समान था। पहले खेलमंत्री गौरव गौतम ने समर्थकों के साथ रोड शो निकाला और ठीक इसके बाद उत्कर्ष चौधरी भी उसी रास्ते पर अपने समर्थकों के साथ आगे बढ़े।
एक ही बाजार, अलग समय और पोस्टरों से गायब विधायक की तस्वीर
भले ही दोनों कार्यक्रमों का समय अलग-अलग रहा, लेकिन एक ही दिन और एक ही मुख्य बाजार में हुए इस शक्ति प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। उत्कर्ष चौधरी के रोड शो के लिए शहरभर में लगाए गए बैनरों में स्थानीय विधायक और खेलमंत्री गौरव गौतम की तस्वीर तक नहीं थी, जिसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ गौरव गौतम विधायक और मंत्री के तौर पर पलवल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्कर्ष चौधरी केंद्रीय राज्यमंत्री के परिवार और युवा संगठन में अपनी पहचान के दम पर अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
संगठन के पुराने साथी, लेकिन अब राहें अलग?
गौरव गौतम और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के पुराने राजनीतिक संबंध भी इस पूरे वाकये को दिलचस्प बनाते हैं। साल 2014 में कृष्णपाल गुर्जर ने गौरव गौतम को अपना सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया था और उस समय गौतम को गुर्जर के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता था। गौरव गौतम ने भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र-मुंबई प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां संभालने के बाद 2024 में पलवल से विधानसभा चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता करण सिंह दलाल को 33,605 वोटों से हराया था। पहली बार विधायक बनते ही उन्हें नायब सैनी सरकार में मंत्री पद मिला।
दूसरी ओर, उत्कर्ष चौधरी भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजपा युवा मोर्चा) के प्रदेश उपाध्यक्ष रहने के साथ-साथ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक कोई विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन केंद्रीय राज्यमंत्री के भतीजे होने और युवा संगठन में पकड़ के चलते पलवल में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है।
2029 की तैयारी या महज त्योहार का जनसंपर्क?
विधानसभा चुनाव 2029 में अभी काफी समय है, लेकिन पलवल में एक ही दिन दोनों खेमों से जुड़े नेताओं का लगभग एक ही रूट पर रोड शो निकालना महज एक संयोग है या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक संदेश, यह बड़ा सवाल बन गया है। फिलहाल दोनों ही नेताओं की तरफ से किसी भी तरह के आपसी टकराव या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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