हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में हुए 150 करोड़ रुपये के बहुचर्चित एफडीआर घोटाले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस बड़े सरकारी गबन की मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए अब अंबाला जेल में बंद आरोपितों से आमने-सामने कड़ी पूछताछ करेगी।

पंचकूला। नगर निगम में हुए 150 करोड़ रुपये के बहुचर्चित एफडीआर घोटाले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सरकारी राशि के इस कथित गबन की मनी ट्रेल को पूरी तरह खंगालने के लिए दायर की गई याचिका को विशेष पीएमएलए अदालत ने गंभीरता से विचार करने के बाद मंजूर कर लिया है। विशेष अदालत ने कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत कुल नौ मुख्य आरोपितों से अंबाला केंद्रीय जेल में लगातार पांच दिन तक आमने-सामने गहन पूछताछ करने और उनके आधिकारिक बयान दर्ज करने की अनुमति जांच एजेंसी को दे दी है। Panchkula Municipal Corporation FDR Scam की कड़ियों को जोड़ने के लिए यह पूछताछ बेहद अहम मानी जा रही है।

गबन और साजिश की जुड़ेगी कड़ियां

सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार ईडी अब जेल में बंद इन आरोपितों के बयानों के जरिए मुख्य रूप से यह जानने का प्रयास करेगी कि सरकारी धन के इतने बड़े गबन की साजिश को आखिर किस प्रकार रचा गया था। इसके साथ ही बैंक के स्तर पर फर्जी दस्तावेज किस तरह तैयार हुए और यह लूटी गई सरकारी रकम आखिरकार किन-किन निजी बैंक खातों तक पहुंचाई गई। यह पूरा मामला 30 मार्च को दर्ज की गई ईडी की ईसीआईआर से जुड़ा हुआ है, जो वास्तव में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) पंचकूला द्वारा 24 मार्च को दर्ज की गई मूल एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

बैंक मैनेजर ही निकला मुख्य मास्टरमाइंड

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार नगर निगम पंचकूला की कोटक महिंद्रा बैंक सेक्टर-11 शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा करोड़ों रुपये की सरकारी राशि को फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेहद शातिराना तरीके से निकाल लिया गया था। ईडी ने अदालत को सूचित किया है कि इस पूरी धोखाधड़ी का मुख्य मास्टरमाइंड बैंक का तत्कालीन शाखा प्रबंधक पुष्पिंदर सिंह था, जिसने विकास कौशिक, दिलीप कुमार राघव और अन्य सह-आरोपितों के साथ मिलकर इस सुनियोजित साजिश को अंजाम दिया था। मास्टरमाइंड पुष्पिंदर सिंह को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य आरोपित एसीबी के मामले में अंबाला जेल में बंद हैं।

सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में पूछताछ

पीएमएलए अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा-50 के तहत आरोपितों के बयान दर्ज करना निष्पक्ष जांच के लिए बेहद जरूरी है। अदालत ने ईडी की टीम को 13 से 17 जुलाई तक रोजाना सुबह 9 से शाम 5 बजे तक अंबाला केंद्रीय जेल के भीतर पूछताछ करने की विशेष अनुमति प्रदान की है। यह पूरी कार्रवाई जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में की जाएगी और उसकी फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। पूछताछ के दौरान आरोपितों के वकील कुछ दूरी पर मौजूद रहेंगे, लेकिन वे अधिकारियों और आरोपितों के बीच होने वाली गुप्त बातचीत को सुन नहीं सकेंगे।