अजय सैनी, भिवानी। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर बुधवार को भिवानी और कैरू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया। कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर देश के प्रति उनके महान योगदान को याद किया। इस दौरान भिवानी और कैरू में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
नेहरू जी की दूरगामी सोच का नतीजा है आज का भारत: अनिरुद्ध चौधरी
इस मौके पर ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने कहा कि आज हम जिस आधुनिक भारत को देख रहे हैं, वह पंडित नेहरू की दूरगामी सोच का ही परिणाम है। उन्होंने करीब 17 साल तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करते हुए राष्ट्र की मजबूत नींव रखी।
आजादी के वक्त जब देश में संसाधनों की भारी कमी थी, तब नेहरू जी ने योजना आयोग (Planning Commission) का गठन किया। साल 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना की शुरुआत कर उन्होंने देश में कृषि, सिंचाई और उद्योगों के एक नए युग का सूत्रपात किया।
भाखड़ा नांगल और बोकारो जैसे प्रोजेक्ट्स आधुनिक भारत के मंदिर
अनिरुद्ध चौधरी ने बताया कि नेहरू जी ने भाखड़ा नांगल बांध, रिहंद बांध और बोकारो इस्पात कारखाना जैसे विशाल प्रोजेक्ट्स की स्थापना की थी। वे इन्हें गर्व से ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा करते थे। उन्होंने सेल (SAIL), भेल (BHEL) और गेल (GAIL) जैसी बड़ी सरकारी कंपनियों की स्थापना कर देश को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। राष्ट्र निर्माण के लिए उन्होंने अपनी 200 करोड़ रुपये की संपत्ति भी देश हित में दान कर दी थी।
इसके अलावा, देश को वैज्ञानिक रूप से सक्षम बनाने के लिए उन्होंने आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) और एम्स (AIIMS) जैसे विश्व स्तरीय संस्थानों की आधारशिला रखी। बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और स्कूलों में मुफ्त भोजन व दूध की व्यवस्था शुरू की। समाज सुधार के लिए उन्होंने छुआछूत विरोधी कानून (1955) और दहेज विरोधी कानून (1961) लागू किए।
शहरी कांग्रेस ने भी दी श्रद्धांजलि, लिया संकल्प
दूसरी तरफ, शहरी कांग्रेस द्वारा रोदरगढ़ स्थित कार्यालय में भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप जोगी के नेतृत्व और प्रधान ईश्वर शर्मा की अध्यक्षता में हुआ।
इस मौके पर कांग्रेस नेता ईश्वर शर्मा ने कहा कि नेहरू जी ने एक ऐसे समय में देश की कमान संभाली थी जब चुनौतियां अपार थीं। उन्होंने स्टील प्लांट और भारी उद्योगों की स्थापना कर भारत को औद्योगिक क्रांति की राह पर आगे बढ़ाया। इस दौरान डॉ. फूल सिंह धनाना, जयवीर गोयत, बलबीर सिंह सरोहा, बलवान घणघस सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने हाथ उठाकर नेहरू जी के लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी भाईचारे के विजन को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

