पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों के निपटारे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को दोहराया है। कोर्ट ने महिला की विषम परिस्थितियों को देखते हुए पानीपत की अदालत में चल रहे तलाक के मुकदमे को तुरंत फरीदाबाद स्थानांतरित करने का बड़ा आदेश जारी किया है।

चंडीगढ़। हरियाणा हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े सभी मामलों की एक ही अदालत में सुनवाई के सर्वमान्य सिद्धांत को दोहराते हुए पानीपत की फैमिली कोर्ट में लंबित तलाक की याचिका को फरीदाबाद स्थानांतरित करने का बड़ा आदेश दिया है। माननीय उच्च न्यायालय ने माना कि पीड़ित पत्नी अपनी सात वर्षीय मासूम बेटी के साथ वर्तमान में फरीदाबाद में रह रही है और उसकी जीविका चलाने के लिए कोई भी स्वतंत्र आय नहीं है। इसके साथ ही फरीदाबाद शहर में उसके तीन अन्य कानूनी मामले भी पहले से लंबित चल रहे हैं। ऐसे में इन सभी मामलों की एक ही अदालत में संयुक्त सुनवाई होना दोनों पक्षों के हित में होगा। Panipat Faridabad Divorce Case Transfer के इस फैसले से महिला को बड़ी राहत मिली है।

मायके में रह रही है पीड़ित महिला

जस्टिस हरकेश मनुजा ने एक असहाय महिला की स्थानांतरण याचिका को स्वीकार करते हुए यह बड़ा न्यायिक आदेश पारित किया है। महिला द्वारा दायर की गई इस याचिका में पति द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 के तहत पानीपत की फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की मुख्य याचिका को फरीदाबाद की सक्षम फैमिली कोर्ट में स्थानांतरित करने की गुहार लगाई गई थी। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार दोनों का विवाह 21 जुलाई 2018 को पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था और दंपती की एक सात वर्षीय बेटी है। वैवाहिक विवाद अत्यधिक बढ़ने के बाद पति ने 17 सितंबर 2024 को पानीपत की फैमिली कोर्ट में तलाक की यह याचिका दायर की थी।

फरीदाबाद में पहले से लंबित हैं तीन केस

पत्नी की ओर से सम्मानित अदालत को बताया गया कि वह अपनी बेटी के साथ फरीदाबाद स्थित मायके में रह रही है और बेटी की स्कूली पढ़ाई भी फरीदाबाद में ही हो रही है। पानीपत और फरीदाबाद के बीच करीब 150 किलोमीटर की लंबी दूरी है, जिससे हर पेशी पर जाना उसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन है। उसने यह भी बताया कि फरीदाबाद की जिला एवं सत्र अदालत में उसके तीन अन्य मामले पहले से लंबित हैं। इनमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की याचिका, घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत शिकायत तथा महिला थाना एनआइटी फरीदाबाद में दर्ज एफआइआर शामिल है।

पति की तरफ से कोई नहीं हुआ पेश

इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट से बकायदा नोटिस मिलने के बावजूद पति की ओर से कोई भी वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का स्पष्ट हवाला देते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच लंबित सभी संबंधित मामलों की सुनवाई सामान्यतः एक ही सक्षम अदालत में होनी चाहिए, ताकि दोनों पक्षों को अनावश्यक आर्थिक व मानसिक कठिनाई से बचाया जा सके और न्यायिक प्रक्रिया भी सुगम बनी रहे। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने पानीपत की फैमिली कोर्ट को संबंधित रिकार्ड तत्काल फरीदाबाद भेजने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।