जुबैर अंसारी, सुपौल। शनिवार को पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सुपौल में बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान करने पहुंचे। इस दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की गंभीर स्थिति को देखकर वह आक्रोशित हो उठे और प्रशासन से लेकर सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना साधा।
सांसद पप्पू यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि भीम नगर और वीरपुर से लेकर सहरसा और मधुबनी तक सभी ठेकेदार और अधिकारी लूटपाट में लगे हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गुजरात और दक्षिण भारत से आए ठेकेदार इस क्षेत्र को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। सांसद ने दावा किया कि बीजेपी के एक राज्यसभा सांसद के अपने निजी ठेकेदार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जिन्हें वह किसी भी कीमत पर बख्शेंगे नहीं और सुप्रीम कोर्ट तक घसीटकर ले जाएंगे।

क्या है कोसी-मेची अंतर-राज्यीय लिंक परियोजना?
यह महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना बिहार के सीमांचल और उत्तर बिहार के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- मुख्य उद्देश्य: कोसी नदी के मानसून के दौरान बहने वाले अतिरिक्त पानी को महानंदा बेसिन की मेची नदी तक पहुंचाना है, जिससे बाढ़ के प्रकोप को कम किया जा सके और सूखे की मार झेल रहे किसानों को भरपूर सिंचाई मिल सके।
- परियोजना की लंबाई: यह पूरी प्रणाली लगभग 117.50 किलोमीटर लंबी है, जिसमें पूर्वी कोसी मुख्य नहर का पुनर्निर्माण और किशनगंज के माखनपुर गांव तक नया विस्तार शामिल है।
- लाभान्वित जिले: इससे बिहार के चार प्रमुख जिलों अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार के किसानों की लगभग 2.10 से 2.14 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सीधा लाभ मिलेगा।
- लागत और वित्तपोषण: इस परियोजना की कुल लागत लगभग 6,282.32 करोड़ रुपये है। इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY-AIBP) के तहत शामिल किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 3,652.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी जा रही है।
- समय सीमा: इस पूरी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2029 तक निर्धारित किया गया है।
बाढ़ की विभीषिका के बीच सांसद के इस आक्रामक तेवर ने राज्य की राजनीति और विकास कार्यों में पारदर्शिता के मुद्दों को एक बार फिर गरमा दिया है।


