कुंदन कुमार, पटना। बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में गर्माहट आ गई है। इस बड़े न्यायिक फैसले पर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद (एमएलसी) नीरज कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि न्यायपालिका के फैसले सर्वोपरि हैं और जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भुगतना पड़ता है।
हम न तीन में हैं, न तेरह में
विपक्ष और आलोचकों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के फैसले में राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा:
याचिकाकर्ता का रुख: मामला सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाकर्ता के जरिए पहुंचा, जिसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।
निष्पक्षता: जदयू न तो इस मामले में ‘तीन में है और न ही तेरह में’।
सरकार की नीति: बिहार सरकार का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कानून अपना काम करता है और सरकार न तो किसी को फंसाती है और न ही किसी को बचाती है।
न्यायपालिका पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब
नीरज कुमार ने न्याय प्रणाली पर विश्वास जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो लगातार न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जब भी किसी बड़े नेता या बाहुबली पर कानूनी शिकंजा कसता है, तो वे खुद को पीड़ित बताकर राजनीति शुरू कर देते हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव का जिक्र करते हुए जदयू प्रवक्ता ने कहा कि वह भी हर कानूनी कार्रवाई के बाद यही राग आलापते थे कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।
अनर्गल बयानबाजी पर जताया ऐतराज
दुलारचंद हत्याकांड का संदर्भ देते हुए नीरज कुमार ने अपने और अपने परिवार के ऊपर लगाए गए आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनके और उनके बच्चे के खिलाफ जिस तरह की अमर्यादित टिप्पणियां की गईं, वह पूरी तरह से निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल अनर्गल बयानबाजी करके सरकार की छवि धूमिल करने की नाकाम कोशिश करते हैं, लेकिन अदालत के फैसले ने सच्चाई को सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

