कुंदन कुमार, पटना। शहर के ऐतिहासिक कारगिल चौक पर आज सियासी पारा उस समय चढ़ गया, जब बिहार के जमुई जिले में हुई हालिया अमानवीय घटना के विरोध में कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना था कि मौजूदा सरकार महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिसके चलते राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

​सम्राट चौधरी के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन

​प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं का गुस्सा अपने चरम पर नजर आया। उन्होंने बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ सम्राट चौधरी हाय-हाय के नारे लगाए और सरकार विरोधी तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। विरोध प्रदर्शन को और अधिक उग्र बनाते हुए कार्यकर्ताओं ने कारगिल चौक पर सम्राट चौधरी का पुतला भी फूंका। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य में जिस प्रकार से महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि शासन-प्रशासन अपराधियों पर नकेल कसने में पूरी तरह नाकाम हो चुका है।

​सुरक्षा देने में असफल सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं

​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही महिला नेत्रियों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बिहार में महिलाएं आज अपने ही राज्य में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। जमुई की घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि राज्य की मौजूदा सरकार बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने दावों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर रही है।
​कांग्रेस नेत्रियों ने कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि, जो सरकार प्रदेश की आधी आबादी यानी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में नाकाम साबित हो रही है, उस निकम्मी सरकार को एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। ऐसी सरकार को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस और कड़े कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप देगी और पूरे राज्य में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेगी।
​इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कारगिल चौक पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसे बाद में पुलिस बल की मौजूदगी में नियंत्रित किया गया। जमुई की घटना और उसके बाद पटना में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर से बिहार की सियासत में महिला सुरक्षा के मुद्दे को गरमा दिया है।