पटना में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर ठग को पुलिस ने आखिरकार धर दबोचा है। विजिलेंस विभाग से सेवानिवृत्त एक पदाधिकारी के बेटे श्रीधर पाठक को पटना पुलिस ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले दो साल से फरार चल रहा था और विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस ने उसकी योजना पर पानी फेर दिया।
कैसे देता था ठगी को अंजाम?
मूल रूप से नालंदा का रहने वाला श्रीधर लंबे समय से दानापुर में रह रहा था। उसने पटना के दीघा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मखदुमपुर (गेट नंबर-93 के पास) में अपना एक ऑफिस खोल रखा था। वह शेयर मार्केट में 30 से 50 प्रतिशत तक के भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को निवेश करने के लिए उकसाता था।
लोगों का भरोसा जीतने के लिए उसने शुरुआती 10 से 12 महीने तक निवेशकों को मुनाफे की छोटी रकम लौटाई भी। इस शुरुआती मुनाफे के झांसे में आकर लोगों का उस पर अंधविश्वास बैठ गया। इसके बाद लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई और जीवनभर की जमापूंजी उसके पास निवेश कर दी। जब करोड़ों रुपये जमा हो गए, तो वह ऑफिस बंद करके अचानक फरार हो गया।
बहन-बेटी की शादी का पैसा भी डूबा
जैसे ही पीड़ितों को श्रीधर की गिरफ्तारी की खबर मिली, वे भारी संख्या में कोतवाली थाने पहुंचने लगे। पीड़ितों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों और बहनों की शादियों के लिए पैसे जोड़कर रखे थे, जिन्हें श्रीधर ने निवेश के नाम पर हड़प लिया।
पीड़ितों ने नम आंखों से बताया कि उन्होंने अपने डूबे हुए पैसों को वापस पाने के लिए आरोपी के आगे हाथ-पैर तक जोड़े थे, लेकिन उसने एक भी रुपया वापस नहीं लौटाया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि इस ठगी के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा सके।

