सर्दियों के साथ दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका के बीच सरकार ने निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाने का फैसला किया है। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में अधिकृत पार्किंग की फीस दोगुनी कर दी जाएगी। यह व्यवस्था 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। हालांकि, दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) की पार्किंग को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है।
सिर्फ पार्किंग महंगी करना कितना कारगर?
हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या केवल पार्किंग फीस दोगुनी करने से लोग निजी वाहन चलाना कम कर देंगे। इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि लोगों को सार्वजनिक परिवहन कितनी आसानी और सुविधा से उपलब्ध होता है। जिन इलाकों में मेट्रो और बस की कनेक्टिविटी बेहतर है, वहां लोग निजी वाहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुन सकते हैं। वहीं, जहां सार्वजनिक परिवहन की पहुंच सीमित है या अंतिम छोर तक पहुंचने में परेशानी होती है, वहां पार्किंग शुल्क बढ़ने के बावजूद निजी वाहनों का इस्तेमाल जारी रह सकता है।
पहले भी बढ़ी है पार्किंग फीस
दिल्ली में पार्किंग फीस बढ़ाने का फैसला पहली बार नहीं लिया जा रहा है। इससे पहले 2023 और 2024 में भी पार्किंग शुल्क बढ़ाने के फैसले किए गए थे। 2025 में प्रदूषण की स्थिति खराब होने के बीच नई दिल्ली इलाके में पार्किंग फीस दोगुनी कर दी गई थी। उस समय सामान्य सरफेस पार्किंग में फोर-व्हीलर की फीस 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति घंटा और टू-व्हीलर की फीस 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति घंटा कर दी गई थी। वहीं, बसों के लिए पार्किंग शुल्क 150 रुपये से बढ़कर 300 रुपये प्रति घंटा हो गया था।
किसके लिए गाड़ी छोड़ना मुश्किल है?
एक तरफ ऐसे लोग हैं, जहां मेट्रो या बस की कनेक्टिविटी अच्छी है और घर से स्टेशन या स्टेशन से ऑफिस तक पहुंचना आसान है। ऐसे लोगों के लिए महंगी पार्किंग सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुनने की वजह बन सकती है। लेकिन हर व्यक्ति के पास यह विकल्प उपलब्ध नहीं होता। बच्चों या बुजुर्गों के साथ सफर करने वाले, ज्यादा सामान लेकर चलने वाले, दिनभर कई जगहों पर मीटिंग के लिए जाने वाले या ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए निजी वाहन जरूरत बन सकता है, खासकर जहां लास्ट-माइल कनेक्टिविटी कमजोर है।पर्यावरण विशेषज्ञ राजेश पॉल के मुताबिक, जब तक घर से वर्कप्लेस और फिर वापस घर तक का सफर सहज और सुविधाजनक नहीं होगा, सिर्फ पार्किंग फीस बढ़ाकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना मुश्किल होगा।
असली सवाल पार्किंग नहीं, विकल्प का है
अगर किसी व्यक्ति के पास कार के अलावा आसान और सुविधाजनक विकल्प नहीं है, तो पार्किंग शुल्क 40 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति घंटा होने के बावजूद वह कार का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में प्रदूषण कम करने के लिए केवल पार्किंग शुल्क बढ़ाने पर निर्भर रहने के बजाय सार्वजनिक परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना भी जरूरी होगा। इसके साथ सुरक्षित फुटपाथ, बेहतर पैदल मार्ग और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर मेट्रो स्टेशन से घर की दूरी महज 300 मीटर है, लेकिन फुटपाथ खराब है, रास्ते में पर्याप्त रोशनी नहीं है या पैदल चलना असुरक्षित महसूस होता है, तो लोग निजी वाहन या कैब को प्राथमिकता दे सकते हैं।
वर्क फ्रॉम होम से कितना फर्क पड़ेगा?
इस बार पार्किंग फीस बढ़ाने के साथ सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने और ऑफिस टाइमिंग में बदलाव की भी योजना है। पर्यावरण विशेषज्ञ राजेश पॉल के मुताबिक, इसका असर सबसे पहले उन इलाकों में दिखाई दे सकता है, जहां ऑफिस और व्यावसायिक गतिविधियां ज्यादा हैं। इन क्षेत्रों में सड़कों पर वाहनों की संख्या घटने से स्थानीय स्तर पर प्रदूषण कम हो सकता है।
हालांकि, इसका असर पूरे शहर के एंबिएंट एयर क्वालिटी इंडेक्स पर तुरंत दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कोविड-19 के दौरान भी देखा गया था कि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने के साथ समय के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ था। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम और ऑफिस टाइमिंग में बदलाव का प्रभाव भी वाहनों की आवाजाही में कमी के साथ धीरे-धीरे सामने आ सकता है।
साइकिल और फुटपाथ भी हैं समाधान
दिल्ली में प्रदूषण कम करने की चर्चा अक्सर कार, बस और मेट्रो के आसपास केंद्रित रहती है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक सुरक्षित पैदल रास्ते और साइकिलिंग कॉरिडोर भी परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति मेट्रो स्टेशन से सुरक्षित फुटपाथ के जरिए ऑफिस तक पहुंच सके या छोटी दूरी साइकिल से तय कर सके, तो हर छोटे सफर के लिए निजी वाहन निकालने की जरूरत कम हो सकती है। कई देशों में साइकिलिंग को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के साथ जोड़कर देखा जाता है। दिल्ली जैसे शहर में भी सुरक्षित और एकीकृत साइकिल नेटवर्क लोगों को छोटे सफर के लिए निजी वाहनों का विकल्प दे सकता है।
अकेली पार्किंग फीस से नहीं बदलेगी तस्वीर
जानकारों के मुताबिक, महंगी पार्किंग को अकेले प्रदूषण कम करने का समाधान मानना मुश्किल है। इसका असर तभी ज्यादा प्रभावी हो सकता है, जब लोगों को निजी वाहनों के बजाय सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प भी उपलब्ध हों। पार्किंग शुल्क बढ़ाने के साथ सार्वजनिक परिवहन, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, पैदल मार्ग, साइकिलिंग नेटवर्क और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों का संयुक्त असर ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार की ओर से भी प्रदूषण बढ़ने से पहले कई उपायों और पहलों के जरिए तैयारी की जा रही है, जिनमें पार्किंग शुल्क बढ़ाना एक हिस्सा है।
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