सत्यपाल राजपूत, रायपुर. प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ जारी है. एक जुलाई से शिक्षा सत्र शुरु हो गया है, लेकिन कई काॅलेजों में व्याख्याता ही नहीं है. अब तक अतिथि व्याख्याताओं को नियुक्ति नहीं दी गई है. इसके चलते पढ़ाई ठप है. बता दें कि कई काॅलेजों में अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे ही पढ़ाई होती है.

दीप्ति वार्मा, महेन्द्र साहू, आशा वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है. अतिथि व्याख्याता यानी हमें ज्वाइनिंग ही नहीं दिया गया है तो काॅलेज में पढ़ाई कैसे होगी ? हर महाविद्यालय में अतिथि व्याख्याताओं की संख्या कहीं 60 तो कहीं 80 प्रतिशत है. इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है.

उच्च शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर कितना सतर्क है ? कितना जिम्मेदार है ? इस बात से आंकलन किया जा सकता है कि शिक्षा का सत्र 1 जुलाई से आरंभ हो गया है और अब तक महाविद्यालयों में व्याख्याता नहीं है. ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि बगैर व्याख्याता पढ़ाई कैसी होगी ? अतिथि व्याख्याता ज्वाइनिंग की मांग को लेकर मंत्रालय, संचालनालय एवं विधायक, मंत्री सभी लोगों को ज्ञापन चुके हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हुई है. आज फिर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अतिथि व्याख्याताओं ने उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल से ज्वाइनिंग की गुहार लगाते हुए ज्ञापन सौंपा.


सभी महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे होती है पढ़ाई
दीप्ति वर्मा, महेन्द्र साहू, एवं आशा वर्मा ने बताया कि शिक्षा का सत्र प्रारंभ हो गया है, लेकिन एक माह बाद भी अभी तक ज्वाइनिंग नहीं दिया जा रहा है. आश्चर्य की बात है कि बगैर व्याख्याता महाविद्यालय कक्षा कैसे संचालित कर रहा है ? सवाल उठाते हुए अतिथि व्याख्याताओं ने कहा कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में परमानेंट अध्यापक की संख्या कहीं दो कहीं तीन हैं और सेटअप 10 से 15 का होता है, अतिथि व्याख्याताओं को ज्वाइनिंग दिया ही नहीं गया है जो पूरा मोर्चा संभालते है. इस तरह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.