पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। जिले में राजनीति परिश्रय से चलने वाले अवैध रेत खदान और परिवहन का मामला किसी से छिपा नहीं है। इसी बीच माइनिंग विभाग की एक और कार्रवाई चर्चा में आ गया है। विभाग की जिला अधिकारी 7 अक्टूबर को खोखसरा में आयोजित होने वाले सेवा सेतु शिविर में पहुंची थी, लौटते वक्त मूंगिया नाला के पास रेत परिवहन करते एक ट्रैक्टर को जब्त कर थाने के सुपुर्द कर दिया। अब इस कार्रवाई के विरोध में पीएम आवास का हितग्राही उतर आया है।

SDM दफ्तर के सामने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी

देवभोग नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 7 में रहने वाले हितग्राही सनत नागेश ने कलेक्टर के नाम एसडीएम दफ्तर में लिखित ज्ञापन दिया है, जिसमें कहा है कि यहां के खदाने बंद है। उन्हें मौखिक रूप से बताया गया था कि रेत का इंतजाम अपने स्तर पर कर सकते हैं।

सनत नागेश ने बताया कि अपने परिजन के ट्रैक्टर से वह रेत मंगवा रहा था, आवास निर्माणाधीन है, वाहन भी अपने जवाबदारी में मंगाया था, कार्रवाई होने से उसे आर्थिक और मानसिक क्षति पहुंच रही है। कलेक्टर से पीड़ित ने 3 दीन के भीतर वाहन रेत समेत छोड़ने का गुहार लगाया है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो एसडीएम दफ्तर के सामने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी भी दे दिया है।

सीईओ ने कही मामले में संज्ञान लेने की बात

मामले जिला खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर के मोबाइल में कॉल और मैसेज कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया है। मामले जिला पंचायतों सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा पीएम आवास हितग्राहियों के लिए ई पोर्टल बनाया गया है। पंजीयन कराने के निर्देश भी दिए, ताकि कोई परेशानी न हो और उन्हें बगैर रायल्टी के रेत उपलब्ध हो जाए। सीईओ ने मामले में संज्ञान लेने की बात कही है।

प्रभारी मंत्री ने योजना का किया बखान, इधर अफसर ने पकड़ लिया वाहन

सेतु शिविर के भरी सभा में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने पीएम आवास योजना और हितग्राहियों को दी जाने वाली सुविधा का हवाला देकर राज्य सरकार की उपलब्धि को गिनाया था। इसी सभा से लौटकर माइनिंग अफसर ने कार्रवाई कर हितग्राहियों को धर्मसंकट में डाल दिया।

अपने 40 किमी की परिधि को झांक ले माइनिंग विभाग

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर ने भी इस कार्रवाई को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि आवास हितग्राहियों को रेत उपलब्ध कराने सरकार ने ई पोर्टल का प्रावधान किया है। प्रशासन की जिम्मेदारी थी हितग्राहियों का पंजीयन कराए। जागरूकता और चेतावनी भी विकल्प था, सीधे कार्रवाई उचित नहीं है। विभाग अपने 40 किमी की परिधि में झांककर देखें कितने खदाने और रेत भरी गाड़िया अवैध संचालित है। उस पर कार्रवाई को केंद्रित करने के बजाए हितग्राहियों को परेशान करना उचित नहीं है।

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