रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस, झामुमो और इंडिया गठबंधन को घेरा। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जो राजनीतिक दल नीट मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वे झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं पर मौन क्यों हैं। रघुवर दास ने कहा कि झारखंड ने एक साथ नौ प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित होने का दुर्भाग्यपूर्ण रिकॉर्ड बनाया है, जो युवाओं के साथ गंभीर अन्याय है।

उन्होंने हाल ही में आयोजित क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि कई अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रवेश पत्र डाउनलोड करने का लिंक मिला। वहीं संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछे गए, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।

उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा का भी उठाया मुद्दा

पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दौड़ परीक्षा के दौरान 12 आदिवासी-मूलवासी युवाओं की मौत और सैकड़ों अभ्यर्थियों के घायल होने की घटना सरकार की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को जिम्मेदारी देने पर सवाल

रघुवर दास ने आरोप लगाया कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी टीडीपीएल नामक उस निजी एजेंसी को दी गई, जिसे वर्ष 2025 में जेएसएससी पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका था। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

केंद्र के कानून का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया है, जिसमें दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही उन्होंने कहा कि नीट-यूजी परीक्षा दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित कर केंद्र ने छात्रों का विश्वास बहाल करने का प्रयास किया।

छात्रों से की शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील

रघुवर दास ने छात्रों से किसी भी राजनीतिक उकसावे में न आने की अपील करते हुए कहा कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाएं, ताकि युवाओं के हितों की रक्षा हो सके।