सर्दियों के दौरान दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इससे निपटने के लिए दिल्ली सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। सरकार ने वायु प्रदूषण की निगरानी और प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) शुरू किया है। सरकार के मुताबिक, यह आधुनिक केंद्र रियल टाइम में वायु प्रदूषण से जुड़े स्रोतों की निगरानी करेगा। प्रदूषण से संबंधित किसी समस्या या नियमों के उल्लंघन की जानकारी सामने आने पर संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
AI से होगी प्रदूषण स्रोतों की निगरानी
ICCC के जरिए अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा की निगरानी की जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक की मदद से प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों की पहचान करने और संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदूषण की समस्या सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय रियल टाइम निगरानी के जरिए तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को 24 घंटे संचालित होने वाले अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का उद्घाटन किया। सरकार के मुताबिक, यह सेंटर सर्दियों में प्रदूषण की निगरानी और तत्काल कार्रवाई के लिए वॉर रूम के तौर पर काम करेगा। यहां से प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी और समस्या सामने आने पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी।
AI और CCTV से निर्माण साइट्स की लाइव मॉनिटरिंग
ICCC के जरिए 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली निर्माण साइट्स की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और CCTV कैमरों की मदद से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर नजर रखना और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। दिल्ली में फिलहाल 707 निर्माण साइट्स की निगरानी की जा रही है। AI और CCTV आधारित सिस्टम के जरिए इन साइट्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
AQI स्टेशनों पर ICCC की नजर
दिल्ली में वायु प्रदूषण की निगरानी और उस पर तत्काल कार्रवाई के लिए शुरू किए गए अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से राजधानी के सभी AQI स्टेशनों पर लगातार नजर रखी जाएगी। सेंटर के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि किसी क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने के पीछे स्थानीय स्तर पर कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हैं। ICCC से MRSM की लोकेशन, रूट और संचालन की भी निगरानी की जाएगी। इसके अलावा नए कैमरों के जरिए खुले में कचरा या बायोमास जलाने जैसी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इस तरह प्रदूषण के संभावित स्थानीय स्रोतों की पहचान कर संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।
39 सब-डिवीजन में 78 QRT टीमें तैनात
दिल्ली के 39 सब-डिवीजन में 78 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की गई हैं। ICCC से मिलने वाली जानकारी और डेटा के आधार पर ये टीमें मौके पर पहुंचकर तत्काल कार्रवाई करेंगी। कंट्रोल सेंटर में कर्मचारियों और अधिकारियों की चार शिफ्टों में तैनाती की गई है, जिससे दिल्ली की 24 घंटे निगरानी की जा सके। सरकार के मुताबिक, ICCC से राजधानी में प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। दिल्ली सरकार के मुताबिक, यह AI-सक्षम ICCC आधुनिक तकनीक से लैस है और इसे देश का सबसे बड़ा AI-सक्षम कंट्रोल सेंटर बताया गया है।
सिरसा बोले- तकनीक से होगी तुरंत कार्रवाई
दिल्ली में वायु प्रदूषण की निगरानी और उस पर तत्काल कार्रवाई के लिए दिल्ली सरकार ने तकनीक आधारित व्यवस्था शुरू की है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि यह सेंटर रियल टाइम में प्रदूषण के स्रोतों पर नजर रखने में मदद करेगा। सरकार के मुताबिक, ICCC के जरिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी क्षेत्र में प्रदूषण से संबंधित समस्या सामने आने पर सेंटर से संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी जाएगी, ताकि स्थिति के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सके।
तकनीक के जरिए प्रदूषण पर निगरानी
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ICCC से मिलने वाले रियल टाइम डेटा के आधार पर प्रदूषण के संभावित स्रोतों की पहचान करने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। सेंटर के जरिए AQI स्टेशनों, निर्माण स्थलों और खुले में कचरा या बायोमास जलाने जैसी गतिविधियों पर भी निगरानी की जा रही है। इसके लिए AI और CCTV तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिल्ली में ITMS को भी मंजूरी
पर्यावरण मंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली के लिए मंजूर किए गए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का भी जिक्र किया। सिरसा ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये की लागत वाले ITMS को मंजूरी दी है।
दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती, नो PUC-नो फ्यूल लागू; ग्रीन पटाखों की अपील
नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने निगरानी के साथ-साथ नियमों के पालन को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि आधुनिक तकनीक के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान की जा रही है और संबंधित विभागों को तेजी से कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
ITMS से ट्रैफिक सिग्नल भी होंगे मैनेज
मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, दिल्ली के लिए मंजूर किए गए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए यह तय करने में मदद मिलेगी कि किसी ट्रैफिक सिग्नल पर रेड और ग्रीन लाइट कितनी देर तक रहे। इसका उद्देश्य रेड सिग्नल पर वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने को कम करना है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होने के साथ वाहन प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
1 अक्टूबर से ‘नो PUC, नो फ्यूल’
दिल्ली में 1 अक्टूबर से ‘नो PUC, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू हो गई है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। पर्यावरण मंत्री ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे ईंधन भरवाने से पहले अपने वाहन का वैध PUC जरूर बनवा लें। नियम का उल्लंघन करने पर चालान की कार्रवाई भी हो सकती है।
दीपावली पर ग्रीन पटाखों की अपील
दीपावली के दौरान प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए दिल्ली सरकार ने लोगों से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सरकार ने लोगों से ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल करने को कहा है, ताकि त्योहार मनाने के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

