अहमदाबाद/वलसाड। गणेश उत्सव और त्योहारों के बाद जल निकायों में विसर्जित की जाने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियां अब न तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएंगी और न ही आस्था को ठेस पहुंचाएंगी। गुजरात के वलसाड के डॉ. बिनिश देसाई और सूरत स्थित ‘पुष्पम्’ संस्था ने पीओपी की विसर्जित और खंडित मूर्तियों को स्टडी टेबल में बदलने का एक अभिनव प्रयास शुरू किया है।
मुंबई, नवी मुंबई और वलसाड नगर निगम से टाई-अप करके जल निकायों और समुद्र तटों से विसर्जित गणेश और मां दशामा की मूर्तियां एकत्र की जा रही हैं। मुंबई के तटों की सफाई करने वाली ‘बीच प्लीज’ संस्था भी वलसाड और मुंबई से मूर्तियां भेजने में सहयोग कर रही है।
पर्यावरण और शिक्षा दोनों को फायदा
इस रीसाइक्लिंग पहल के तहत पिछले साल ‘पुष्पम्’ संस्था द्वारा 750 स्टडी टेबल बनाए गए थे, जबकि इस साल 5,000 टेबल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न सामाजिक संस्थाएं ये टेबल खरीदकर जरूरतमंद और वंचित बच्चों को बांटती हैं।
कार्बन उत्सर्जन में कमी और आर्थिक मदद
डॉ. देसाई के अनुसार, एक स्टडी टेबल बनाने में लगभग 3 किलो पीओपी का उपयोग होता है, जिससे 7.3 किलो कार्बन उत्सर्जन कम होता है। यह टेबल 30 किलो तक का वजन उठाने में सक्षम है। इसके अलावा, प्रति टेबल 100 रुपये अनुदान के रूप में फंड एकत्र किया जाता है। इस पहल से अब तक 78 हजार रुपये से अधिक का फंड जुटाया जा चुका है, जिसका उपयोग सामाजिक कार्यों में हो रहा है।
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