आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), पार्टी के अन्य नेताओं और पत्रकार सौरव दास (Saurav Das) के खिलाफ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarana Kanta Sharma) को लेकर किए गए कथित अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट को अब तक नहीं हटाए जाने की जानकारी सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) को दी गई। यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट किए जाने से जुड़ी आपराधिक अवमानना कार्यवाही का हिस्सा है।

अशोक चैतन्य ने अदालत में रखी बात

शिकायतकर्ता अशोक चैतन्य ने जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की डिवीजन बेंच के समक्ष कहा कि संबंधित पोस्ट अभी तक डिलीट नहीं किए गए हैं। आज की सुनवाई में अदालत ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की है। केजरीवाल के वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें अभी तक अवमानना कार्यवाही के आधार में शामिल पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला है। इसके बाद बेंच ने रजिस्ट्री को संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

सामग्री हटाने के दावे पर हलफनामा मांगा

याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने का आरोप लगाते हुए अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता अशोक चैतन्य ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई में उन्होंने ट्वीट हटाए जाने की बात कही थी, लेकिन उनके अनुसार संबंधित सामग्री अभी भी सोशल मीडिया पर मौजूद है और हटाई नहीं गई है। सोमवार की सुनवाई में अदालत ने चैतन्य से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने और संबंधित सामग्री को रिकॉर्ड पर लाने को कहा।

‘सुनियोजित अभियान’ चलाने का आरोप

चैतन्य ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि रिक्यूजल याचिका की सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं और पत्रकार सौरव दास की ओर से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर एक ‘सुनियोजित अभियान’ चलाया गया। याचिका के मुताबिक, इस दौरान जज के खिलाफ गंभीर, बेबुनियाद और अपमानजनक आरोपों वाली सामग्री पोस्ट और शेयर की गई।

केजरीवाल समेत अन्य को 6 सप्ताह में देना है जवाब

अदालत ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए अवमानना मामले में अरविंद केजरीवाल और अन्य संबंधित लोगों को जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। यह मामला कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट से संबंधित है। याचिका के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल, सौरव दास समेत कुछ अन्य लोगों की ओर से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले पोस्ट किए गए थे। इनमें उनकी पदोन्नति और उनके बेटे-बेटी से जुड़े दावे भी शामिल होने का आरोप है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इन पोस्ट और आरोपों को कथित तौर पर झूठा और भ्रामक प्रचार अभियान बताया था। इसके बाद उन्होंने संबंधित मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था और मामले में अवमानना कार्यवाही शुरू हुई थी।

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब निचली अदालत की ओर से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कथित शराब घोटाले से जुड़े आरोपों को रद्द किए जाने के बाद सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध हुआ। इसके बाद केजरीवाल की ओर से मामले की सुनवाई के लिए जज बदलने की मांग की गई। उन्होंने पहले दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस संबंध में अनुरोध किया। जब यह मांग स्वीकार नहीं हुई तो जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष रिक्यूजल याचिका दायर की गई। इसी दौरान सोशल मीडिया पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता को लेकर कई तरह के दावे और पोस्ट सामने आए। शिकायतकर्ता के अनुसार, इनमें जज के खिलाफ कथित तौर पर गंभीर और अपमानजनक आरोप लगाए गए थे। इन्हीं सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बाद में अवमानना कार्यवाही का मामला सामने आया।

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