(सुधीर दंडोतिया की कलम से)

ऐसा जुलुम…शिष्टाचार में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी

नगरीय विकास एवं आवास विभाग में इन दिनों एक ऐसा फरमान ऊपर से आया कि मानो ठेकेदारों पर बड़ी गाज गिर गई हो। मामला शिष्टाचार से जुड़ा हुआ है। करोड़ें-अबरों का पुराना भुगतान लटका दिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग संचालनालय के तीसरी मंजिल से खबर है कि अब भुगतान के लिए शिष्टाचार की दरों में वृद्धि कर दी गई है। अब मामला कुल भुगतान के लिए सीधा तीन प्रतिशत शिष्टाचार पर आ गया है। यह फरमान भी विभाग के सुपर हाई लेवल की ओर से हैं। सुपर हाई लेवल के आगे तो सरकार भी कुछ नहीं। फिर बेचारे ठेकेदार किस खेत की मूली।

पॉवर गॉशिप: नए नवेले प्रवक्ताओं के पास पहुंचे फोन, डर गए नेताजी…घर आए नेताजी को भी पार्टी में शामिल नहीं करवा पाई कांग्रेस…पद दिया लेकिन भैया का सम्मान नहीं रखा गया…सवाल पर बड़ा बवाल, जमकर तू-तू, मैं-मैं…कागजों में डीजल

बुरा न मानो, हमारी भी तो होली है…

होली में पुलिस की मुस्तैदी के कारण खाकी का त्यौहार दूसरे दिन शुमार पर होता है। धुरेड़ी के दिन सुरा प्रेमियों को पकड़ने का काम करने वाली पुलिस दूसरे दिन मद मस्त रहे तो इससे हमें क्या। हां, लेकिन जब मामला ऐसा हो जाए कि आईपीएस रैंक के अधिकारी ही ऐसे मदहोश हो जाए कि अपने वरिष्ठों की ही कलाई खोलने लगे तो बात दूसरी है। हुआ भी ऐसा ही दरअसल, पुलिस अफसरों की होली पार्टी में एक छोटे कद के बड़े अधिकारी फुल हो गए और मदहोशी में जिनती कसक भरी थी सब उतार दी। जोर-जोर की आवाज तो फिर सबको सुनाई देती हैं। खबर भी आग की तरह फैल गई। मुखबिरों से बात अफसरों तक भी पहुंची। लेकिन, बुरा न मानो होली है।

पॉवर गॉशिप: जब टिकट फाइनल कमेटी के सदस्य ने खुद का आगे बढ़ाया नाम… पिछले वादे को विरोधियों ने बनाया मुद्दा, फंसा दिया टिकट… चाहत कम नहीं फिर बनना है सांसद, टिकट कटा तो छोड़ी पार्टी… IAS अधिकारी का तबादला, अब बीवी के ट्रांसफर के लिए परेशान

मंशा अनुरूप दाल नहीं गली

सत्ता परिवर्तन के बाद नए सिरे से दाल गलाने को लेकर नेताओं से लेकर अफसरों ने कई तरह के जतन किए. दाल भिगोने के लिए भरपूर पानी में जाने का हजारों में से सिर्फ इक्का-दुक्का को ही मौका मिला. लेकिन जिस मंशा के साथ दाल लेकर पानी में उतरे. वहां गले-गले तक भरपूर पानी होने के बाद भी किसी की भी मंशा अनुरूप दाल नहीं गली. इस बीच चुनाव की आचार-संहिता लग जाने से नेताओं से लेकर अफसर अधर में खड़े हैं. अब चुनाव बाद अच्छे से दाल गलेगी. इस उम्मीद के साथ पानी में बहाव के बीच खड़े हुए हैं.

पॉवर गॉशिप: अटल जी के परिवार पर नजर, जाति के कारण बचा टिकट, बिना काम के मंत्रीजी, हम कांग्रेस में, लेकिन नेता वही हैं, व्यवस्था फिर हो गई भंग, मंत्रालय जैसे कलेक्टर कार्यालय हो…

चेहरे बदलने होंगे

चर्चा एक राजनैतिक दल के एक महत्वपूर्ण सेंटर की है. जहां चलने वाली राजनैतिक दलीलों के बीच चर्चा इस बात को लेकर छिड़ गई कि अब कांग्रेस को क्या करना होगा. अपनी विधा में विशेषज्ञों ने काफी देर तक मंथन किया. फिर एक महत्वपूर्ण नेता ने सुझाव दिया कि कोई रास्ता नहीं. अब केंद्रीय चेहरे बदलने ही होंगे. बाकी सभी विशेषज्ञों ने इस पर सहमति जताई और चेहरे बदलने का सुझाव व्यक्ति से सामूहिक हो गया.

विधायकजी को नहीं पच रही निगम में तवज्जो

मामला प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा है. जहां पार्टी के महत्वपूर्ण नेता भोपाल नगर निगम में प्रमुख पद पर हैं और निगम के आयोजनों में उनकी उपस्थिति अनिवार्य ही रहती है. आचार संहिता से पहले नगर निगम के मद से एक विधानसभा में ताबड़तोड़ भूमिपूजन हुए तो क्षेत्रीय विधायक ने पार्षदों से कहकर बैनर-पोस्टर्स में महोदय का फोटो नहीं लगने दिया. एक के बाद एक चार वार्डों में एक जैसे हालात रहे. जानकारी महोदय तक पहुंची तो वो हक्का-बक्का रह गए, क्योंकि विधायक महोदय के चुनाव में उन्होंने भरसर सहयोग किया था. खबर है कि विधायकजी का यह कारनामा संगठन तक पहुंच गया है.

आखिर जा क्यों रहे हैं

बीजेपी ने ज्वाइनिंग का महाकुंभ क्या आयोजित किया. देखते ही देखते बीजेपी की ओर से दावे किए गए कि एक लाख नहीं बल्कि ढ़ाई लाख से अधिक कार्यकर्ताओं की बीजेपी में ज्वाइनिंग हुई है. यह बात प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जमकर फैली. इधर, बीजेपी का बयान जारी हुआ और उधर कांग्रेस कार्यालय में इस पर गहन मंथन हुआ. नेताओं के बीच इस पर गहन चिंतन होता रहा कि आखिर कांग्रेसी पार्टी छोड़-छोड़कर क्यों जा रहे हैं.

और आखिरी वक्त में रुक गया ये दिग्गज

मध्यप्रदेश कांग्रेस में दलबदल का खेल लगातार जारी है कांग्रेस से बीजेपी में नेताओं को लाने के लिए बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने प्लानिंग के तहत कांग्रेस के नाराज नेताओं से संपर्क कर रहे हैं इसी बीच मालवा के कांग्रेस के दिग्गज नेता भी बीजेपी के संपर्क में आए जैसे ही कांग्रेस के बड़े नेताओं को इसकी जानकारी लगी आननफानन में नेताजी से संपर्क साधा गया….उन्हें समझाया गया और भविष्य की चिंता को दूर किया गया इसके बाद उन्होंने अपने बीजेपी में जाने के फैसले को टाल दिया.

मुरैना नहीं, खींचतान का जड़ विदिशा था

मध्यप्रदेश कांग्रेस में पीढ़ी परिवर्तन के बावजूद नेताओं के बीच में आपसी मनमुटाव की खबरें लगातार आ रही है इस बार पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच टिकट बंटवारे को लेकर खटपट की खबरें आई…. खबरें निकलकर आई की मुरैना की टिकट को लेकर दोनों नेता आमने-सामने हो गए लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी दूसरी है, लड़ाई विदिशा सीट से भानु प्रताप शर्मा को टिकट देने के बाद से शुरू हुई थी क्योंकि उमंग सिंघार यहां से एक महिला नेत्री को टिकट दिलाना चाहते थे.

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