प्रदीप मालवीय, उज्जैन। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने सनातन धर्म से जुड़े त्योहारों के स्वरूप में हो रहे बदलावों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने दो वरिष्ठ धर्माचार्यों पंडित धीरेंद्र शास्त्री और अवधेशानंद गिरी महाराज को पत्र लिखकर शास्त्रीय समाधान मांगा है।

संस्था के संस्थापक, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश पुजारी द्वारा जारी पत्र में सवाल पूछे गए हैं। पत्र में महासंघ ने कहा है कि आप दोनों महानुभाव सनातन धर्म के रक्षक माने जाते हैं, जैसे आदि शंकराचार्य थे, जिनके द्वारा सनातन धर्म की भारत में स्थापना हुई। आपके होते हुए भी सनातन धर्म को नुकसान एवं परंपराओं को तोड़ने का प्रयास कई दिनों से किया जा रहा है। देश में हजारों महामंडलेश्वर व आचार्य हैं, उसके बाद भी यह सिलसिला निरंतर जारी है।

महेश पुजारी ने तीखे सवाल करते हुए कहा कि जैसे ही सिंहस्थ आता है तो अपने मठों और आश्रमों के लिए सरकार से आर्थिक सहायता मांगने का प्रयास संत लोग करते हैं। संत भिक्षा वृत्ति करे तो अच्छे लगते हैं, लेकिन सरकार से भीख मांगना अनुचित है। इस पर धर्माचार्य क्या कदम उठाएंगे? 

जैन समाज के साधु संत बनने के बाद धन का संग्रह नहीं करते, लेकिन सनातन धर्म के संत धन संग्रह कर व्यापार व लॉज चलाते हैं, सरकारी भूमियों पर अतिक्रमण भी करते हैं। क्या यह हिंदू सनातन संत का लक्षण है या अवगुण? सनातन धर्म के त्योहारों का जिस तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है, परंपरागत पूजा पद्धति व त्योहारों को तोड़ा जा रहा है और अशास्त्रीय प्रमाण से आयोजन किए जा रहे हैं, जिससे परंपराओं को ठेस पहुंच रही है।

उन्होंने पूछा है कि परंपरागत गणेश उत्सव कितने दिन का होना चाहिए? स्थापना से विसर्जन तक का शास्त्रीय प्रमाण अवगत कराएं? दुर्गा नवरात्रि में गरबा खेलने की प्रथा है, उसे कितने दिन तक मनाया जाना चाहिए? इसका शास्त्रीय प्रमाण बताएं। रावण का वध किस मास में किस तिथि पर हुआ और रावण दहन का शास्त्रीय आधार क्या है और किस शास्त्र में उल्लेख है?

पत्र में उल्लेख है कि यदि रावण दहन केवल सीता हरण के लिए किया जाता है तो दुर्योधन और दुशासन ने तो रावण से ज्यादा कुकृत्य किया था, तो रावण ज्यादा व्यभिचारी था या दुर्योधन और दुशासन? इस विषय को लेकर सनातन धर्म की जो बदनामी / मजाक उड़ाया जा रहा है, उस पर प्रखरता से बोलने का आग्रह किया गया है। पत्र के अंत में हस्तलिखित रूप से जोड़ा गया है कि – उज्जैन के संत महंत महामंडलेश्वर कोई भी रावण दहन के विषय में प्रश्न उत्तर नहीं दे सका, क्या इनको शास्त्र का ज्ञान नहीं है। महासंघ ने दोनों धर्माचार्यों से आग्रह किया है कि कृपया हमारी संस्था को उपरोक्त विषयों पर शास्त्रीय मत से अवगत कराएं ताकि सनातन धर्म के लोगों को सही जानकारी दी जा सके।

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