अबोहर में नशा विरोधी मैराथन की अनुमति नहीं मिलने पर उठाए सवाल, निर्वाचन आयोग से जल्द आदर्श आचार संहिता लागू कराने की अपील

चंडीगढ़। पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के नेता सुनील जाखड़ ने राज्य की भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से हस्तक्षेप की मांग की है। जाखड़ ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर निर्वाचन आयोग से पंजाब में जल्द आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू करने की सिफारिश करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे आगामी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकेंगे।

मैराथन की अनुमति नहीं मिलने पर सरकार को घेरा

सुनील जाखड़ ने अपने पत्र में पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हालात बिगड़ रहे हैं। जाखड़ के मुताबिक, राज्य सरकार ने खुद कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए अबोहर में नशा विरोधी मैराथन आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

भाजपा नेता ने इस फैसले को आधार बनाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर ऐसी स्थिति बताई जा रही है, तो आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना भी अहम हो जाता है।

राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को लिखे पत्र में जाखड़ ने आग्रह किया कि वह मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और निर्वाचन आयोग से पंजाब में जल्द से जल्द आदर्श आचार संहिता लागू करने की सिफारिश करें।

उन्होंने कहा कि चुनाव ऐसी परिस्थितियों में होने चाहिए, जहां मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें। जाखड़ ने आगामी विधानसभा चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

एसडीएम के पत्र को भी बनाया आधार

अपनी मांग के समर्थन में सुनील जाखड़ ने अबोहर के अनुमंडलीय मजिस्ट्रेट (SDM) की ओर से जारी पत्र की प्रति भी संलग्न की। यह पत्र 27 अक्टूबर को जाखड़ परिवार द्वारा संचालित ‘जाखड़ ट्रस्ट’ को भेजा गया था।

पत्र में अबोहर शहर की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए मैराथन के आयोजन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने में असमर्थता जताई गई थी।

एक नवंबर को होनी थी मैराथन

सुनील जाखड़ ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि नशे के खिलाफ जागरूकता से जुड़ी इस मैराथन का आयोजन एक नवंबर को किया जाना था। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस मामले ने पंजाब में कानून-व्यवस्था और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा ने जहां राज्यपाल के माध्यम से निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है, वहीं इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।