आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadda) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी साझा कर कहा कि विरोध-प्रदर्शन के नाम पर आम जनता को परेशान करना या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। राघव चड्ढा ने कहा कि लोकतंत्र में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। राजनीतिक नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून का सम्मान हो और शांति बनी रहे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे ऐसा कोई काम न करें, जिससे देश को नुकसान पहुंचे।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में देशभर में लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। इसी के विरोध में पार्टी दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसी बीच, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के बावजूद CJP के दो नेता सौरव दास और आशुतोष रांका वहां पहुंच गए। दोनों तिरंगा लहराते हुए नारे लगा रहे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
दीपके ने किया था तिरंगा मार्च का आह्वान
अपने साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। उन्होंने लोगों से शाम पांच बजे दिल्ली के सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर इकट्ठा होने की अपील की थी। तिरंगा मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। इसके बाद CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि दीपके को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। रत्ना सिंह के मुताबिक, दीपके को कहां रखा गया है, इसकी जानकारी अब तक नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वकीलों को दीपके से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
दीपके दूसरी बार हिरासत में, रांका और दास तिहाड़ जेल में बंद
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बताया कि CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत हिरासत में लिया गया है। पिछले छह दिनों में यह दूसरी बार है, जब दीपके को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें विमान से ही हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया था। वहीं, CJP के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। उन्हें 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
कनॉट प्लेस में रोज 250 करोड़ के नुकसान का दावा
दिल्ली के कनॉट प्लेस में विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों से कारोबारियों को नुकसान हुआ है, तो मुआवजा दिलाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। कारोबारियों की ओर से पेश अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राय ने दावा किया कि प्रदर्शनों के चलते कनॉट प्लेस में रोजाना करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के उस फैसले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद किया गया था।
लोगों की आजीविका भी अहम
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और स्टॉल लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों की आजीविका भी महत्वपूर्ण है। यदि विरोध-प्रदर्शनों या सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण उनके कारोबार को नुकसान पहुंचता है, तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जरूरी निर्देश दे सकती है। पीठ ने कहा कि मुआवजे और सार्वजनिक कानून के तहत उसके पास व्यापक अधिकार क्षेत्र है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई विरोध-प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। इस तरह के अलग-अलग हितों से जुड़े मामले अदालत के सामने आते हैं।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

