सत्या राजपूत, रायपुर। नवा रायपुर में मंत्रालय कर्मचारियों को लेकर जा रही स्टाफ बस में आग लगने की घटना के बाद अब मंत्रालय और संचालनालय की बसों की फिटनेस को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि 4 साल पहले फिटनेस खत्म होने के बावजूद करीब 5 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ऐसी बसों से सफर कर रहे हैं, जिनकी फिटनेस को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जाती रही हैं।

अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमल वर्मा ने आरोप लगाया कि मंत्रालय और संचालनालय में संचालित बसों की फिटनेस वर्ष 2022 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद इन बसों का संचालन जारी है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि फिटनेस खत्म होने के बाद भी बसों को संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

कमल वर्मा ने कहा कि चाहे संबंधित अधिकारी हों या बस ठेकेदार, जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

‘जान हथेली पर रखकर कार्यालय पहुंचते हैं कर्मचारी’

संचालनालय संघ के अध्यक्ष जय कुमार साहू ने बसों की स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी घर से कार्यालय के लिए निकलते समय अपनी जान हथेली पर लेकर चलते हैं। बसों की खराब स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जय कुमार साहू ने दावा किया कि कई बार बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं और यात्रियों को दूसरी बस से भेजना पड़ता है। कभी बस से अचानक धुआं निकलने की शिकायत होती है तो बरसात के दौरान बस के अंदर पानी तक रिसता है।

उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में स्थिति यह रहती है कि अधिकारी-कर्मचारी धूप से बचने के लिए अपने बैग तक खिड़कियों में लगाकर बैठते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बसों के संचालन में किस स्तर की व्यवस्था और निगरानी हो रही है।

98 बसों से सफर करते हैं अधिकारी-कर्मचारी

संघ पदाधिकारियों के मुताबिक मंत्रालय और संचालनालय के करीब 98 बसों में अधिकारी-कर्मचारी आवागमन करते हैं। उनका आरोप है कि इन बसों की फिटनेस को लेकर गंभीर सवाल होने के बावजूद संचालन जारी है।

जय कुमार साहू ने कहा कि कभी बस का गेट गिर जाता है तो कभी चलते-चलते बस अचानक बंद हो जाती है। उन्होंने एक पुरानी घटना का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी ही बस की चपेट में आने से एक कर्मचारी को अपना पैर गंवाना पड़ा था। अब बस में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि 23 सितंबर को बस में आग लगने के बाद उसमें बैठे अधिकारी-कर्मचारियों ने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

‘हर कर्मचारी से तीन हजार से ज्यादा किराया’

जानकारी के मुताबिक, इन बसों के संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है और ठेका कंपनी बसों का संचालन कर रही है। संचालनालय संघ के अध्यक्ष ने बस संचालन की व्यवस्था और खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एक कर्मचारी के लिए बस सुविधा पर 3 हजार रुपये से अधिक किराया दिया जाता है। इसके बावजूद यदि कर्मचारियों को खराब और असुरक्षित बसों में सफर करना पड़ रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के कारण अधिकारी-कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली जा रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

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